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यूक्रेन से कैसे हो रही है छात्रों की वापसी?

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:59 PM IST

भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से निकालने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। रूस की आक्रामक सैन्य कार्रवाई के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी यूरोपीय देश में फंसे भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए मंगलवार को वायुसेना को मोर्चे पर जुट जाने को कहा है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना, यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन गंगा नामक इस अभियान के तहत, कई सी-17 विमान तैनात कर सकती है।
हाल में सभी फंसे हुए भारतीयों को पश्चिम यूक्रेन जाने की सलाह दी गई लेकिन उन्हें सीधे सीमा तक नहीं पहुंचने की ताकीद दी गई थी। देश के चार शीर्ष केंद्रीय मंत्रियों को भी पड़ोसी देशों में भारत के विशेष दूत के रूप में भेजा गया है ताकि युद्धग्रस्त देश से भारतीय छात्रों को आसानी से निकालने में मदद दी जा सके और इस अभियान की रफ्तार तेज की जा सके। इससे यूक्रेन से ज्यादातर भारतीय छात्रों के निकलने में आ रही दिक्कत जाहिर होती है।
भारतीयों को निकालने का सबसे सुविधाजनक रास्ता यूक्रेन-रूस सीमा है, जो खारकीव और कीव के मुख्य शहरों से सिर्फ  70 किलोमीटर दूर है। लेकिन यहां समस्याएं स्पष्ट हैं। रोमानिया, हंगरी और पोलैंड के साथ लगी सीमा भी पश्चिम में हैं। विदेश मंत्रालय के कंट्रोल रूम ने अब तक 8,000 कॉल और 6,000 ईमेल का जवाब दिया है।
सरकार लॉजिस्टिक्स का भी ध्यान रख रही है, मसलन कुछ बसें पोलैंड सीमा पर फंसे छात्रों को देश में ले जाने के लिए इंतजार कर रही थीं ताकि उन्हें देश की विमानों तक पहुंचाया जा सके। पोलैंड के रेजेस्जॉव में भोजन और रिहायश की व्यवस्था की गई है। लेकिन सीमा पर बहुत भीड़ है।
इसी तरह के इंतजाम रोमानिया में भी किए गए। इससे भी अधिक जटिल यूक्रेन से मोल्दोवा की तरफ  निकलना है जो हर तरफ  से घिरा है और वहां से रोमानिया के लिए भारतीयों को राजधानी बुखारेस्ट से वापसी की उड़ान दिलाई जा सकती है। एक और विकल्प छात्रों के लिए सुदूर दक्षिण-पश्चिम में उजगोरोड के रास्ते यूक्रेन से बाहर आने का रास्ता हंगरी की तरफ  आता है।
कुछ समस्याओं का अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन कुछ अप्रत्याशित हैं। उदाहरण के लिए स्लोवाकिया में हवाईअड्डा बड़ी संख्या में विमानों को नहीं संभाल सकता है। कुछ पड़ोसी देशों में हवाई क्षेत्र बंद हैं ऐसे में वाणिज्यिक उड़ानों की लागत काफी अधिक बढ़ गई है। हालांकि, भारत अपने नागरिकों के लिए सभी अभियान मुफ्त में कर रहा है। रोमानिया में भारतीय दूतावास ने एक चेतावनी जारी की कि अगर भारतीयों को निकलने के लिए पैसे की मांग की जा रही है तो उन्हें भुगतान नहीं करना चाहिए क्योंकि सरकार हर चीज के लिए भुगतान कर रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने यह स्वीकार किया है कि खारकीव में मौजूद भारतीयों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा और सरकार के पास इस बात का कोई आकलन नहीं था कि शहर में अब भी कितने भारतीय हैं। उन्होंने कहा, ‘पहले हमें पंजीकरण के आधार पर तादाद का अंदाजा था लेकिन संख्या भी बदल रही है।’
यूक्रेन से 182 भारतीय नागरिकों को लेकर एअर इंडिया का विमान मुंबई पहुंचा
एअर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान यूक्रेन में फंसे 182 भारतीय नागरिकों को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से लेकर मंगलवार सुबह मुंबई पहुंचा। विमानन कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने मुंबई हवाई अड्डे पर नागरिकों का स्वागत किया। राणे ने विमान के भीतर छात्रों को संबोधित भी किया। उन्होंने बताया कि बताया कि एअर इंडिया एक्सप्रेस का विमान 9-1202 बुखारेस्ट से कुवैत होते हुए सुबह 7 बजकर 40 मिनट पर मुंबई पहुंचा। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे ने एक विज्ञप्ति में कहा कि वापस लौटे 182 भारतीयों में से महाराष्ट्र के 25, हरियाणा के 38, उत्तर प्रदेश के 34, गुजरात के 10 जबकि बाकी यात्री देश के अन्य हिस्सों से हैं। बुखारेस्ट से मुंबई पहुंचा यह दूसरा निकासी विमान है। इससे पहले, 219 भारतीय नागरिकों को लेकर एअर इंडिया का एक विमान बुखारेस्ट से शनिवार को सीएसएमआईए पहुंचा था।
भारत रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद युद्धग्रस्त देश में फंसे अपने नागरिकों को 27 फरवरी से रोमानिया और हंगरी के रास्ते स्वदेश ला रहा है। रोमानिया और हंगरी यूक्रेन के पड़ोसी देश हैं। यूक्रेन में करीब 14 हजार भारतीय फंसे हैं, जिनमें से अधिकतर छात्र हैं।      भाषा

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First Published - March 1, 2022 | 10:48 PM IST

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