दो रातों तक अमित स्वैन और उनके साथी नाविकों की आंखों में नींद नहीं थी। सागर के बीचों-बीच वे सतर्क होकर रतजगा कर रहे थे क्योंकि उनके जहाज पर मिसाइल हमले का खतरा मंडरा रहा था। अमेरिका और इजरायल के बीच संभावित लड़ाई के चलते उन्हें खतरे की चेतावनी मिल रही थी। उस समय उनका जहाज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक से गुजर रहा था। उनके दिलोदिमाग में बस यही खयाल था कि कैसे सुरक्षित अपने घर पहुंचें।
कटक के रहने वाले स्वैन दुबई के एक कंटेनर जहाज के मुख्य अधिकारी हैं और जिस समय चेतावनी मिली उस समय होर्मुज स्ट्रेट के निकट से गुजर रहे थे। उनके 25 सदस्यीय चालक दल में 20 भारतीय शामिल थे। जहाज 24 फरवरी को निर्यात की जाने वाली सामग्री लेकर जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से सऊदी अरब के दम्मम बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था। होर्मुज के निकट पहुंचते ही संचार माध्यमों पर चेतावनी जारी होने लगी कि जहाज पर मिसाइल और ड्रोन हमला हो सकता है।
स्वैन ने उन तनाव भरे दिनों को याद करते हुए कहा, ‘27 और 28 फरवरी की दरमियानी रात हमें सूचना मिली कि अमेरिका और ईरान में जंग छिड़ सकती है। सावधानी के तौर पर जहाज ने अपनी परिचालन योजना बदल दी। हम पहले जेबेल अली बंदरगाह पहुंचे जो उस इलाके का सबसे बड़ा बंदरगाह है और वहां कुछ कंटेनर उतारे गए। दम्मम बंदरगाह जाने की योजना को निरस्त कर हम तत्काल सलालाह बंदरगाह की दिशा में बढ़ चले ताकि हम किसी तरह के हमले की जद से बच सकें।’
यात्रा के दौरान, जहाज ने यूएई के पूर्वी तट पर स्थित फुजैरा बंदरगाह पर बंकरिंग (ईंधन भरने का काम) भी किया। सलालाह में शेष कंटेनरों को उतारने के बाद, लगभग 12 भारतीय नाविकों ने क्षेत्र में संभावित और अधिक तनाव बढ़ने की आशंका के बीच घर लौटने का निर्णय लिया। स्वैन ने कहा, ‘जब हमें युद्ध के बारे में चेतावनी मिली, तो अगले दो रातों तक हममें से कोई भी सो नहीं सका। समुद्र में दो दशकों से अधिक के अपने करियर में मैंने कभी इतनी तनावपूर्ण स्थिति का सामना नहीं किया था। उन घंटों के दौरान जो घबराहट और डर था, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता।
1 मार्च को सलालाह में जहाज से उतरने के बाद, शिपिंग कंपनी के बंदोबस्त के जरिये हम एक विशेष उड़ान से हैदराबाद और फिर वहां से अगले दिन अपने घर पहुंच सके।‘ नाविकों की चिंता तब और बढ़ गई जब उसी कंपनी के एक जहाज सफीन प्राइज को 4 मार्च को कथित तौर पर मिसाइल हमले का सामना करना पड़ा। हमले से जहाज को क्षति पहुंची लेकिन चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए।
भुवनेश्वर के रहने वाले और दुबई की ही एक अन्य कंपनी के नाविक आशीर्वाद ने कहा, ‘हमें लगातार नजदीकी इलाकों से चेतावनी मिल रही थी कि मिसाइल हमला हो सकता है। जहाज पर तनाव व्यापत हो गया था। मैं जैसे ही सुरक्षित बंदरगाह पर पहुंचा, मैंने उतरने का निर्णय लिया क्योंकि जहाजों पर जोखिम बढ़ गया था। मेरी पत्नी बीमारी थी।’
हैदराबाद के एक अन्य जहाज के चालक दल के सदस्य ने नाम जाहिर न करते हुए बताया कि जब सफीन प्रेस्टीज पर हमला हुआ तब उनका जहाज गहरे समुद्र में बह रहा था जब सफीन प्रेस्टीज पर हमला हुआ। उसके चालक दल ने अपनी जान बचाई क्योंकि चेतावनी मिलने के बाद उन्होंने पहले ही जहाज छोड़ दिया था। बाद में उन्हें ओमानी नौसेना ने बचाया। हमले के कुछ घंटे बाद उनका जहाज सलालाह की ओर बढ़ा और वे वहां उतर गए। वहां से उन्हें उड़ान द्वारा घर वापस भेजा गया। स्वैन ने कहा कि वर्तमान में 800 से अधिक जहाज या तो लंगर डाले हुए हैं या संघर्ष क्षेत्र के पास के इलाकों से गुजर रहे हैं। इस बीच शिपिंग कंपनियां सुरक्षा चिंताओं और परिचालन आवश्यकताओं का आकलन कर रही हैं। पिछले 16 दिनों में 20 से अधिक कार्गो जहाजों पर कथित तौर पर हमले हुए हैं, जिनमें कई जहाज क्षतिग्रस्त हुए हैं।