SFURTI- MSME: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय की पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार हेतु निधि (SFURTI) योजना का पारंपरिक कारीगर खूब लाभ उठा रहे हैं। इस योजना से इन कारीगरों की आय में भी इजाफा हो रहा है। इस योजना को एक दशक पहले विभिन्न क्षेत्रों के लिए मंजूरी दी गई थी।
एमएसएमई मंत्रालय के मुताबिक देश भर में पारंपरिक कारीगरों को संगठित कर उनकी आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में इस योजना के तहत काम तेजी से हुआ है। इस योजना के तहत 3.03 लाख पारंपरिक कारीगरों को लाभ मिला है। इसके साथ ही इस योजना के तहत वर्ष 2015-16 से अब तक 513 क्लस्टरों को मंजूरी दी जा चुकी है।
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SFURTI योजना न केवल पारंपरिक कारीगरों को रोजगार दिला रही है, बल्कि यह उनकी आमदनी बढ़ाने में भी सहायक साबित हो रही है। एमएसएमई मंत्रालय का कहना है कि मंत्रालय द्वारा कार्यरत SFURTI क्लस्टरों की समीक्षा से पता चला है कि मूल्य संवर्धन, उत्पाद विविधीकरण तथा घरेलू और निर्यात बाजारों तक पहुंच बढ़ने के कारण कारीगरों की आय में सामान्यतः 15 से 18 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) में नियमित वेतन आधारित कार्य के माध्यम से रोजगार सृजन भी बढ़ा है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका अधिक स्थिर और सुरक्षित हुई है।
इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों को संगठित कर उनकी आय, उत्पादन क्षमता और बाजार पहुंच बढ़ाना है। यह योजना मुख्य रूप से ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को मजबूत करने के लिए चलाई जाती है। इस योजना में हार्ड इंटरवेंशन के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का निर्माण, प्लांट एवं मशीनरी की खरीद और स्थापना तथा कच्चे माल के लिए रॉ मटेरियल बैंक की व्यवस्था की जा रही है। वहीं सॉफ्ट इंटरवेंशन के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, एक्सपोजर विजिट, बायर-सेलर मीट जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत नियुक्त तकनीकी एजेंसियां क्लस्टरों को मार्केटिंग रणनीति तैयार करने, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए बिक्री बढ़ाने, डिजिटल प्रचार और नए मीडिया के उपयोग में भी मदद कर रही हैं।