लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पश्चिम एशिया के चल रहे संघर्ष पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ कहा कि इस संकट से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर बुरा असर पड़ रहा है और भारत के लिए भी यह युद्ध बिल्कुल नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। लोकसभा में 25 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि देश में तेल-गैस संकट न हो। इसके लिए सरकार 40 से ज्यादा देशों से तेल मंगा रही है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि अभी 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। ईरान से ही हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित लौटे हैं, जिसमें 700 से ज्यादा मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं।
PM ने जोर देकर कहा कि संसद से इस मुद्दे पर एकजुट आवाज निकलनी चाहिए, ताकि दुनिया को भारत की चिंता और रुख का सही संदेश जाए। साथ ही PM ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार का रुकावट स्वीकार्य नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत का युद्ध वाले देशों और प्रभावित इलाकों के साथ बहुत बड़ा व्यापार है। यह क्षेत्र हमारे दूसरे देशों से होने वाले व्यापार का भी अहम रास्ता है, खासकर कच्चे तेल और गैस की जरूरत के लिए। यहां से रोजाना भारत को बहुत सारा सामान आता है।
इसके अलावा, करीब एक करोड़ से ज्यादा भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। वहां भारतीय जहाज चलते हैं और भारतीय क्रू सदस्यों की संख्या भी काफी अधिक है। इन सब वजहों से भारत की चिंता स्वाभाविक रूप से ज्यादा है।
PM ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद प्रभावित देशों में हर भारतीय को मदद पहुंचाई गई। उन्होंने ज्यादातर पश्चिम एशियाई देशों के नेताओं से दो बार फोन पर बात की। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया। हालांकि, संघर्ष में कुछ लोगों की जान गई और कई घायल भी हुए। फिर भी सरकार ने हर संभव कोशिश की कि कोई भारतीय अकेला न छूटे।
Also Read: वेस्ट एशिया जंग तेज, ईरान की चेतावनी, होर्मुज बंद हुआ तो तेल संकट गहराएगा; ब्रेंट 112 डॉलर के पार
साथ ही PM मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया का यह संकट सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से पहले युद्ध से पहले रोजाना 13 लाख बैरल तेल और 85 प्रतिशत से ज्यादा LPG भारत पहुंचती थी। अब जहाजों की आवाजाही बहुत मुश्किल हो गई है। फिर भी सरकार ने पूरी कोशिश की कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित न हो।
भारत अपनी LPG की 60 प्रतिशत जरूरत आयात करता है। अनिश्चितता के चलते घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही देश में LPG का अपना उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। PM ने कहा कि पिछले 11 साल में ऊर्जा आयात को विविधता दी गई। पहले 27 देशों से आयात होता था, अब 41 देशों से हो रहा है। देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन सामरिक भंडार भी हैं। टैंकरों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं।
बीते रविवार को PM मोदी ने खुद एक उच्चस्तरीय बैठक भी की थी, जिसमें पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक आदि की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और जरूरी सामान के वितरण को बिना रुकावट जारी रखने पर फोकस था।
बता दें कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान से भी फोन पर बात की थी। इस बातचीत में उन्होंने बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई थी। PM मोदी ने साफ कहा था कि भारत शांति चाहता है और हर तरफ से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
PM मोदी ने कहा कि सरकार ने युद्ध के शुरू से ही हर भारतीय को मदद पहुंचाने का सिलसिला जारी रखा है। जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई को सुचारू रखने के लिए कड़ी मेहनत की गई। घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के साथ ही आयात स्रोतों को बढ़ाने से भी स्थिति संभाली जा रही है।