तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दीं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हो रहे भारी नुकसान के बीच एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन की कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। तेल कंपनियों ने 15 मई को ईंधन की कीमतें 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई थीं।
इस ताजा बढ़ोतरी के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर डीजल की कीमत 90.67 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है। विश्लेषकों के मुताबिक तेल कंपनियां आने वाले हफ्तों में कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकती हैं, क्योंकि उन्हें अभी भी पेट्रोल, डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलिंडर बेचने पर भारी नुकसान हो रहा है।
येस सिक्योरिटीज लिमिटेड के प्रमुख विश्लेषक हर्षराज अग्रवाल ने कहा, ‘इस बढ़ोतरी से भी पेट्रोल और डीजल दोनों की बिक्री पर हो रहे कुल विपणन नुकसान की भरपाई नहीं हो रही है। साथ ही रुपये के अवमूल्यन के कारण अतिरिक्त बोझ है। हमारा मानना है कि आने वाले हफ्तों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि एक ही बार में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करना संभव नहीं होगा।’
सरकारी अधिकारी ने सोमवार को बताया कि 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी सिलिंडर बेचने पर तेल कंपनियों का नुकसान 25 प्रतिशत कम होकर 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन से 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है।
केंद्रीय तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 12 मई को कहा था कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है।
सरकार ने मार्च के आखिर में उपभोक्ताओं को राहत देने और ओएमसी को सहारा देने के मकसद से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद कर 10 रुपये प्रति लीटर कम कर दिया था। हालांकि उत्पाद शुल्क में यह कटौती तेल कंपनियों के नुकसान को कम करने के हिसाब से अपर्याप्त थी। सरकार ने पिछले सप्ताह ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत दिए था, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतें लगभग स्थिर रखी थीं, जबकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं।