महाराष्ट्र सरकार ने शहरीकरण को नया और आधुनिक रूप देने के लिए एक महत्वकांक्षी अर्बन चैलेंज फंड की घोषणा की है। इस फंड का निर्माण शहरों की प्रगति में आने वाली बाधाओं को दूर करने लिए किया जा रहा है। यह फंड केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और निजी भागीदारी से तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास व्यक्त किया कि यह शहरी बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण में महत्वपूर्ण सुधार लाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शहरी विकास में रचनात्मक बदलाव लाने के लिए शहरों को विकास केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए और शहरी चुनौती कोष के माध्यम से विकास कार्य को आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि उनकी प्रगति में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। महाराष्ट्र ने स्थानीय निकायों के विकास के लिए निधि उपलब्ध कराते समय इस दिशा में कदम उठाए हैं और इससे पहले नासिक और पुणे नगर निगमों में इसी आधार पर जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए निधि जुटाई गई है। इन नगर निगमों के लिए निधि जुटाने हेतु राष्ट्रीय शीर्ष समिति (एनएसी) की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। पिंपरी चिंचवड नगर निगम और नागपुर नगर निगम में कुछ परियोजनाओं के लिए भी इसी तरह निधि उपलब्ध कराई जाएगी।
शहरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अर्बन चैलेंज फंड योजना पर विस्तृत चर्चा होने के बाद इस फंड को मंजूरी दी गई। इस अभियान में 90,000 करोड़ रुपये की परियोजना निधि प्रस्तावित की गई है। इसमें से 44,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। जिसमें केंद्र सरकार से 11,200 करोड़ रुपये, राज्य सरकार से 11,200 करोड़ रुपये और बाजार आधारित स्रोतों से 22,400 करोड़ रुपये शामिल हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों की अनुदान आधारित शहरी योजनाओं के साथ-साथ, अर्बन चैलेंज फंड शहरों की संस्थागत, वित्तीय और प्रशासनिक बाधाओं के कारण अवसंरचना परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा । इसके लिए ऋण प्रतिभूतियों और निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से धन जुटाना संभव होगा।
इस मिशन में लगभग 22 प्रमुख घटक शामिल होंगे, जिनमें डिजिटल शासन, मुख्य शहरी बुनियादी ढांचे का विकास, चक्रीय अर्थव्यवस्था, यातायात जाम कम करने की परियोजनाएं, लास्ट मील कनेक्टिविटी, 5 से 20 वर्ग किलोमीटर के शहरी पुनर्विकास, विकास केंद्रों के रूप में छोटे और मध्यम शहर, झुग्गी-झोपड़ियों का पुनर्विकास, पैदल यात्री और साइकिल-अनुकूल परिवहन परियोजनाएं, प्रदर्शन परियोजनाएं, ट्रांजिट हब का उन्नयन, ट्रांजिट-उन्मुख विकास बुनियादी ढांचे का विकास, शहरी विकास केंद्र, रचनात्मक शहरी पुनर्विकास और जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजनाएं शामिल हैं।