अमेरिका भारत को यह भरोसा दिला सकता है कि अगर दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले अंतरिम व्यापार समझौता कर लेते हैं तो वह सेक्शन 301 के तहत कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाएगा। मौजूदा 10 फीसदी के बुनियादी टैरिफ की समय-सीमा 24 जुलाई को ही खत्म होने वाली है। अमेरिका ने इसे 90 दिनों के लिए अपने सभी व्यापार साझेदारों पर लगाया था।
अमेरिका के रुख से अवगत एक अधिकारी ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘अभी समझौता करने का फायदा यह है कि अगर भारत सेक्शन 301 का उल्लंघन करता है तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। टैरिफ पहले से तय 18 फीसदी के स्तर पर ही बरकरार रहेगा। सेक्शन 301 का उल्लंघन करने वाले और बिना किसी व्यापार समझौते वाले देशों के लिए टैरिफ काफी अधिक होंगे।’
दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के मुख्य वार्ताकार भी हैं। वह सोमवार से अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा पर अधिकारियों की एक टीम के साथ नई दिल्ली आने वाले हैं।
दोनों पक्ष अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के अलावा बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ उपायों, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुविधा, निवेश संवर्धन तथा आर्थिक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत वार्ता को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव और भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन ने अप्रैल में अधिकारियों की एक टीम के साथ अमेरिका का दौरा किया था।
विनिर्माण क्षेत्र में ढांचागत अतिरिक्त क्षमता और बंधुआ मजदूरी के इस्तेमाल के आरोपों पर धारा 301 की जांच को अप्रैल 2025 में डॉनल्ड ट्रंप सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए जवाबी शुल्क के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
हाल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर सहित वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि अंतरिम व्यापार समझौता कुछ ही सप्ताह में पूरा हो जाएगा। रूबियो ने पिछले सप्ताह कहा था कि दोनों पक्ष अंतिम मसौदे पर काम कर रहे हैं। गोर ने शुक्रवार को कहा कि बातचीत का महज एक फीसदी हिस्सा ही बचा है।
अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष शुल्क संबंधी कई बाधाओं को सुलझाने के करीब हैं और अंतरिम समझौते में डिजिटल व्यापार के बारे में अमेरिका की कुछ चिंताओं का भी समाधान होने की संभावना है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को केवल सेक्शन 301 के तहत जांच से राहत पाने के लिए कोई एकतरफा व्यापार समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका सेक्शन 301 के तहत टैरिफ का इस्तेमाल करके भारत पर अनुचित रियायतों को स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहा है तो भारत को उसका विरोध करना चाहिए। प्रस्तावित समझौते के तहत भारत को जो कीमत चुकानी पड़ेगी, वह सेक्शन 301 टैरिफ से होने वाले नुकसान से कहीं अधिक होगी।’