भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह में अपनी हिस्सेदारी ईरान की ही किसी इकाई को बेचने की तैयारी कर रहा है। इस अहम मामले से वाकिफ सूत्रों ने इस बारे में जानकारी दी। चाबहार बंदरगाह पर भारत के संचालन को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली रियायत की अवधि समाप्त होने से कुछ दिन पहले यह खबर आई है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल (IPGL) की हिस्सेदारी एक ईरानी कंपनी को बेचने का प्रस्ताव तैयार किया है।
ईरान के बंदरगाह पर भारत की गतिविधियां रविवार तक प्रतिबंध की जद से बाहर रहेंगी। भारत एक ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रहा है जिसके तहत एक स्थानीय कंपनी अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावी रहने तक संचालन संभालेगी और यह गारंटी दी जाएगी कि प्रतिबंध हटने के बाद इसे फिर भारत को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय और बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय को भेजे गए प्रश्नों का समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच विदेश मंत्रालय सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है।
भारत के चाबहार बंदरगाह संचालन को 2018 में ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट दी गई थी। फरवरी 2025 में अमेरिका ने प्रतिबंधों में दी गई रियायत संशोधित या रद्द करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश खासकर उन रियायतों से संबंधित था जिनसे ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक या वित्तीय राहत मिलती है। इनमें ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना से ताल्लुक रखने वाली रियायतें भी शामिल हैं। पिछले साल 29 सितंबर को अमेरिकी विदेश विभाग ने 2018 की छूट रद्द कर दी थी।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस साल फरवरी में संसद को बताया,‘भारत के अनुरोध पर अमेरिकी वित्त विभाग ने 28 अक्टूबर 2025 को एक पत्र जारी किया जिसमें कहा गया कि चाबहार बंदरगाह पर संचालित गतिविधियां 26 अप्रैल 2026 तक अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहेंगी।’
मंत्रालय ने कहा कि भारत ने चाबहार परियोजना में बंदरगाह पर उपकरण खरीदने के लिए लगभग 12 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। इस निवेश से उसे अफगानिस्तान को मानवीय और अन्य प्रकार की आपातकालीन सहायता प्रदान करने में मदद मिली है। वर्ष 2024 में भारत ने कई दौर की बातचीत के बाद बंदरगाह पर टर्मिनल के संचालन के लिए ईरान के साथ 10 साल का समझौता किया था। पिछले साल सरकार ने चाबहार में निवेश के संभावित दुष्प्रभावों का आकलन किया था।
अगर प्रतिबंधों से छूट जारी नहीं रहती है तो उस स्थिति में कानूनी विशेषज्ञों ने कहा था कि इस बंदरगाह में शामिल कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं। अगर वे भी प्रतिबंधों के दायरे में आती हैं तो इससे वैश्विक बंदरगाह उद्योग में भारत की अग्रणी भूमिका निभाने की योजनाओं में बाधा आ सकती है। भारत द्वारा वित्त पोषित चाबहार टर्मिनल का संचालन करने वाली कंपनी आईपीजीएल, सागरमाला डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एसडीसीएल) की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी है (जिसे अब सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन के नाम से जाना जाता है)। यह कंपनी भारत की पहली समुद्री गैर-बैंकिंग वित्त निगम है।
आईपीजीएल भारत ग्लोबल पोर्ट्स कंसोर्टियम का भी हिस्सा है जिसे जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने फरवरी 2025 में विदेशी बंदरगाह परियोजनाओं के लिए बोली लगाने हेतु शुरू किया था। आईपीजीएल म्यांमार में सितवे बंदरगाह का संचालन भी करती है। अगर इस हिस्सेदारी का हस्तांतरण किसी स्थानीय इकाई को होता है तो ये जोखिम कम हो जाएंगे।