भारत की खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की हाल में रेस्टोरेंट पर हुई सख्त कार्रवाई के बाद फूड बिजनेस में नियमों के पालन लेकर सवाल बढ़ गए हैं। परामर्शदाताओं का कहना है कि ऐसे सवाल पिछले कुछ महीनों की तुलना में बीते जुलाई में करीब 40 प्रतिशत बढ़े हैं। परामर्शदाताओं के मुताबिक ये सवाल साफ-सफाई, भंडारण व खाना बनाने के तरीकों से लेकर खाने में इस्तेमाल होने वाले रंगों व तेल, शाकाहारी और मांसाहारी खाने को अलग-अलग रखने और जरूरी डॉक्यूमेंटेशन तक से जुड़े हैं।
मुंबई की ‘आकांक्षा मैनेजमेंट कंसल्टेंसी’ के संस्थापक व मुख्य परामर्शदाता सुधीर कलसुलकर ने बताया कि उनकी कंपनी प्रमाणपत्र मदद, खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और इंटरनल ऑडिटिंग जैसी सेवाएं देती है। उन्होंने कहा कि साल के शुरुआती महीनों की तुलना में अब सवालों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये सवाल मुख्य रूप से रेस्टोरेंट की ओर से खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण व प्रमाणन नियमों को पूरा करने के बारे में हैं, जो एफएसएसएआई की अनिवार्य शर्तों में से एक है।
कलसुलकर ने आगे कहा, ‘अब सख्ती बढ़ने के कारण कारोबारी प्रशिक्षण और डॉक्यूमेंटेशन में मदद ले रहे हैं। हमने जुलाई से अब तक 10-15 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। इनमें हर बैच में करीब 40 लोग शामिल थे जबकि पहले आमतौर पर महीने में सिर्फ एक प्रशिक्षण सत्र होता था।’ ये प्रशिक्षण कार्यक्रम एफएसएसएआई के नियमों के तहत लागू किए जाने वाले साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों के बारे में जानकारी देते हैं।
वैसे ज्यादातर कार्रवाई महाराष्ट्र में हुई है, लेकिन खाद्य मानक प्राधिकरण की इस कार्रवाई का असर दूसरे शहरों में भी दिख रहा है। दिल्ली-एनसीआर की एक फूड परामर्श कंपनी में काम करने वाले विशेषज्ञ ने बताया कि उन्हें रेस्टोरेंट से आने वाले सवालों में काफी बढ़ोतरी दिख रही है। इस व्यक्ति ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, ‘इन महीनों में नियमों के पालन से जुड़े सवालों में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब सख्ती ज्यादा दिख रही है। इसलिए बिजनेस साफ-सफाई, स्टोरेज, खाने में इस्तेमाल होने वाले रंगों, तेल के इस्तेमाल और एफएसएसएआई की अन्य शर्तों के बारे में जानकारी मांग रहे हैं।’ एफएसएसएआई की सख्ती बढ़ने के बाद रेस्टोरेंट का खर्च भी बढ़ गया है। यह खर्च सही प्रशिक्षण, वेंडर प्रमाणन और साफ-सफाई के मानकों को बनाए रखने के कारण बढ़ गया है।
नैशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के दिल्ली को-चैप्टर हेड और दरियागंज हॉस्पिटैलिटी के को-फाउंडर व सीईओ अमित बग्गा से सवाल पूछा गया कि क्या नियमों को मानने से खर्च बढ़ गया है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट मालिकों को नियमों को मानने से जुड़े खर्च करने में कोई दिक्कत नहीं है। बग्गा ने पिछले हफ्ते एनआरएआई और एफएसएसएआई के रेस्टोरेंट के जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘रेस्टोरेंट मालिकों को नियमों को मानने के असली खर्चों जैसे पेस्ट कंट्रोल को पूरा करने में कोई समस्या नहीं है। हालांकि हममें से कई लोगों को अब यह सीखना होगा कि यह काम अधिकृत, थर्ड-पार्टी वेंडर से भी करवाया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, रेस्टोरेंट इन खर्चों को उठाने के लिए तैयार हैं।’
कम्युनिटी प्लेटफॉर्म ‘लोकलसर्कल्स’ के सर्वे के अनुसार सर्वे में शामिल 57 प्रतिशत ग्राहकों ने पिछले 12 महीनों में अपने इलाके के एयर-कंडीशंड रेस्टोरेंट में डाइनिंग एरिया, किचन या वॉशरूम की सुविधाएं गंदी देखी हैं। सर्वे में शामिल लोगों में से 74 प्रतिशत ने यह भी कहा कि रेस्टोरेंट और फ़ूड डिलीवरी ऐप पर हाइजीन रेटिंग सार्वजनिक रूप से दिखाई जानी चाहिए।