पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की गंभीर कमी के बीच शहरी गैस वितरण कंपनियां घरेलू पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) के उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं। वे लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहनों का ऐलान कर रही हैं।
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) और गेल गैस लिमिटेड (गेल गैस) सहित तमाम कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं को 500 रुपये की मुफ्त गैस दे रही हैं। महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए 500 रुपये का पंजीकरण शुल्क माफ कर रही है और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा जमा भी हटा रही है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने सभी व्यावसायिक कनेक्शनों के लिए सुरक्षा जमा माफ करने की घोषणा की है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार पश्चिम एशिया से एलपीजी आपूर्ति में बाधा के कारण उपभोक्ताओं से प्राकृतिक गैस की ओर रुख करने का आग्रह कर रही है, ताकि एलपीजी पर भार कम हो सके और संकट के समय लोगों में अफरा-तफरी न मचे तथा आसानी से ईंधन आपूर्ति होती रहे। भारत अपनी घरेलू एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है।
डाउनस्ट्रीम नियामक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने 14 मार्च को सीजीडी कंपनियों को संसाधन बढ़ाने, मौजूदा कनेक्शनों के उपयोग को बढ़ावा देने और आपूर्ति शुरू करने की समय-सीमा कम करने की सलाह दी है। नियामक के अनुसार 31 जनवरी तक गैस वितरण कंपनियों के पास 1.65 करोड़ पीएनजी कनेक्शन थे, जिनमें से 1.03 करोड़ उपभोक्ता प्राकृतिक गैस का उपयोग कर रहे हैं।
बोर्ड ने कहा, ‘जिन उपभोक्ताओं के लिए अवसंरचना पहले से उपलब्ध है और जो पीएनजी सुविधा लेना चाहते हैं, उन्हें जल्द से जल्द जोड़ा जाए। इन उपभोक्ताओं को पीएनजी आपूर्ति देने से एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव भी कम होगा और खाना पकाने के ईंधन के विविधीकरण में मदद मिलेगी।’ घरेलू गैस वितरण कंपनियों से यह भी कहा गया है कि जहां बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, वहां अधिकतम नए उपभोक्ताओं को घरेलू पीएनजी से जोड़ा जाए। पिछले एक दशक में पाइप्ड गैस कनेक्शन और पाइपलाइन दोनों तरह के पीएनजी नेटवर्क का बहुत तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 से 2024-25 के बीच घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.47 करोड़ से अधिक हो गए हैं। साल 2032 तक इन्हें 12.63 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इस बीच, 14 मार्च के एक आदेश में सरकार ने पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को अपने घरेलू एलपीजी कनेक्शन वापस करने की सलाह दी है और उन्हें नया एलपीजी कनेक्शन लेने से भी रोक दिया है। सोमवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि एलपीजी की कमी भारत के लिए अभी भी चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है और रोजाना लगभग 50 लाख सिलिंडर वितरित किए जा रहे हैं।
ऑनलाइन एलपीजी सिलिंडर बुकिंग लगभग 84 प्रतिशत से बढ़कर करीब 90 प्रतिशत हो गई है। सरकार ने कहा कि वितरक स्तर पर सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकने के लिए डिलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड का कवरेज संकट से पहले 53 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 72 प्रतिशत कर दिया गया है। तेल मंत्रालय ने सभी मौजूदा एलपीजी उपभोक्ताओं से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण यानी ई-केवाईसी पूरा करने को भी कहा है।