भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत दर तय करने वाली छह सदस्यीय समिति ब्याज दरों में कम से कम 50 आधार अंक की वृद्धि कर सकती है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अक्टूबर की नीतिगत दर बैठक में 25 आधार अंक और फिर दिसंबर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही में महंगाई के 6.1 प्रतिशत के चरम पर पहुंचने की आशंका है और यह रिजर्व बैंक के महंगाई के ऊपरी दायरे की सीमा से अधिक होगी। हालांकि वित्त वर्ष 27 की चौथी तिमाही में कमी आ सकती है।
पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। रिजर्व बैंक की ब्याज दर संबंधित फैसले को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य कारक है। इनमें अल नीनो को लेकर लगातार जारी चिंताएं, फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में वृद्धि से भारत व अमेरिका के बीच ब्याज दरों के अंतर का कम होना और मजबूत सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि शामिल हैं।
भारत में खुदरा महंगाई अगस्त, 2026 में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। इसमें लगभग सभी क्षेत्रों में व्यापक बढ़ोतरी देखी गई। ग्रामीण महंगाई बढ़कर 5.23 प्रतिशत हो गई जबकि शहरी महंगाई 4.31 प्रतिशत रही। चुनिंदा चीजों की कीमतें बढ़ने के कारण खाद्य महंगाई बढ़कर 5.66 प्रतिशत हो गई। मुख्य महंगाई (जिसमें भोजन और ईंधन, घरेलू सामान और सेवाएं और परिवहन शामिल नहीं हैं) जुलाई के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.16 प्रतिशत हो गई।
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के नेतृत्व में बैंक के अर्थशास्त्रियों ने बताया कि सितंबर में महंगाई 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका कारण यह है कि महीने के पहले 10 दिनों में सब्जियों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी व्यापक दबाव बन रहा है। त्योहारी मौसम से पहले चीनी और खाद्य तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। कीमतें बढ़ने की इस रफ्तार के मद्देनजर वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही में औसत महंगाई 4.9 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है और यह रिजर्व बैकं के 4.7 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।
एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने मंगलवार को रिपोर्ट में कहा, ‘हमारे अनुमान बताते हैं कि महंगाई लगभग नौ महीनों तक 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी। हमें उम्मीद है कि रिजर्व बैंक अक्टूबर और दिसंबर की नीतिगत बैठक में दर में 25-25 आधार अंक की बढ़ोतरी करेगा। इससे रीपो दर 5.75 प्रतिशत हो जाएगी।’
नोमुरा की अर्थशास्त्री सोनल वर्मा और ऑरोदीप नंदी ने कहा, ‘खाने-पीने की चीजों और तेल की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और हमारे इस अनुमान को देखते हुए कि समग्र महंगाई अक्टूबर-नवंबर में 6 प्रतिशत की सीमा तक पहुंच सकती है या उससे ऊपर जा सकती है, लिहाजा हम अपनी राय बदल रहे हैं। अब हम ‘होल्ड’ (दरों में बदलाव न करने) के बजाय अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 आधार अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।’
एसबीआई रिसर्च के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक महंगाई 2027 की शुरुआत में 6 प्रतिशत से नीचे आने से पहले 6.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। उधर एमयूएफजी को अनुमान है कि रिजर्व बैंक दिसंबर, 2026 और फरवरी 2027 की बैठकों में 25-25 आधार अंक की वृद्धि कर ब्याज दरों में कुल 50 आधार अंक की वृद्धि कर सकती है।