फिनटेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रेजरपे आने वाली तिमाहियों में अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी कर रही है। अलबत्ता पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण इसकी समयसीमा बताना मुश्किल है। सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक शशांक कुमार ने बेंगलूरु में पीरजादा अबरार को बातचीत में बताया कि एजेंटिक भुगतान व्यापारियों के लिए क्या मायने रखता है, नियामक इस पर किस तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं और आईपीओ में अभी कुछ तिमाही का समय क्यों बाकी है। संपादित अंश …
रेजरपे अपने एजेंट स्टूडियो को भुगतान प्रक्रिया से आगे भुगतान प्रबंधन की दिशा में बदलाव के रूप में रख रही है। वित्तीय कार्यों के संबंध में अपने आप काम करने वाली एजेंटिक एआई जवाबदेही के सवाल खड़े करती है। एआई का अधिकार कहां तक है और अगर कोई एजेंट गलत निर्णय लेता है, तो आप जवाबदेही के बारे में क्या सोचते हैं?
प्रणाली को कुछ हद तक गलतियों को मानना चाहिए ताकि आप उनसे सीख सकें और उन्हें सुधार सकें। विवादों के प्रबंधन की बात करें, तो अगर आप 10 लाख विवादों पर काम कर रहे हैं, तो हो सकता है कि उनमें से कुछ में आप गलत प्रदर्शन कर दें। कई मामलों में अगर हमारी प्रणाली गलत हो जाती है, तो हम जिम्मेदारी लेते हैं। हम इसी तरह काम करते हैं और समय के साथ त्रुटि दर को लगातार कम करते रहते हैं। इंसान की निगरानी हमेशा रहती है। जब तक आपको पूरा भरोसा न हो जाए, तब तक आप इंसानी निगरानी जारी रखते हैं। एक बार जब आपको इस बात का पूरा भरोसा हो जाता है कि सब कुछ ठीक चल रहा है, तब आप इंसान निगरानी कम कर देते हैं। विवादों के प्रबंधन में भी यही बात लागू होती है।
पहले यह काफी परिचालन प्रक्रिया थी। अब इसे एजेंट संभालते हैं। आपके पास एक अन्य प्रणाली होगी जो इसकी निगरानी करेगी और समस्याओं को बताएगी। इंसान इन मामलों की समीक्षा करेंगे और एजेंटों में सुधार करेंगे।
एजेंट मार्केटप्लेस एक दिलचस्प संरचनात्मक दांव है। रेजरपे एजेंट स्टूडियो से किस तरह कमाई करती है और क्या इससे मुख्य भुगतान कारोबार का इकाई अर्थशास्त्र में कोई बदलाव आता है?
मूल्य निर्धारण टोकनाइजेशन पर आधारित है। छोटे कार्यों के लिए यह लगभग मुफ्त है। अधिक जटिल कार्यों के लिए खर्च किए जा रहे टोकन या उपयोग की जा रही इंटेलिजेंस के अनुरूप मूल्य तय होगा। एजेंट स्टूडियो के साथ हम कई एजेंट बनाएंगे और पेश करेंगे। लेकिन हम यह भी उम्मीद करते हैं कि अन्य लोग भी स्टूडियो पर एजेंट तैयार और पेश करें, जिनका उपयोग हम आगे बढ़ा सकते हैं। मुझे लगता है कि यह (एजेंट स्टूडियो) हमारी वृद्धि के भविष्य के इंजनों में से एक होगा।
भारत की एसएमबी (छोटे, मझोले कारोबार) श्रेणी ऐतिहासिक रूप से जटिल फिनटेक टूल्स को अपनाने में धीमी रही है। क्या वे एजेंटिक भुगतान के लिए तैयार हैं या यह फिलहाल केवल कुछ हजार डिजिटल रूप से जानकार व्यापारियों के लिए साधन है?
मुझे लगता है कि अभी इसमें वक्त लेगा कि आगे क्या होता है। लेकिन सही ढांचे के साथ एसएमई को इसका इस्तेमाल करने में ज्यादा फायदा होना चाहिए। आज अगर मुझे किसी चीज की जरूरत होती है, तो मैं उसे सर्च करता हूं लेकिन कल शायद ऐसा हो कि मैं किसी एआई एजेंट से कहूं कि वह मेरे लिए उक्त साधन खोजे। एजेंट पारंपरिक सर्च के मुकाबले सर्च करने का काम कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकता है। एसएमई के बड़े वर्ग को इससे निश्चित रूप से फायदा होगा।
आपने कंपनी का पुनर्गठन किया है। इसे फिर भारतीय कंपनी बना दिया और नियामकीय माहौल ज्यादा स्थिर लग रहा है। क्या साल 2026 या 2027 तक आईपीओ की उम्मीद की जा सकती है?
मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने बाजारों में काफी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया है। इसी वजह से अभी कोई पक्की समय-सीमा बताना मुश्किल है। अब भी कुछ कदम बाकी हैं, जैसे आईपीओ का विवरण (डीआरएचपी) जमा करना और सेबी से बातचीत करना। आप काफी ज्यादा अस्थिर माहौल में शेयर बाजार पर सूचीबद्ध होना नहीं चाहेंगे। इसमें अब भी कुछ और तिमाहियां लगेंगी।