facebookmetapixel
Advertisement
उदारीकरण के 35 साल: 1991 में सेंसेक्स में थीं जो 30 कंपनियां, उनमें अब 7 ही बचीं; बेंचमार्क सूचकांक में आया बड़ा बदलावबिज़नेस स्टैंडर्ड सर्वेक्षण: रीपो दर में बदलाव के नहीं आसार, अगली बैठक में हो सकता है बड़ा फैसलानिवेश में जोरदार उछाल या आंकड़ों का भ्रम? 4 परमाणु परियोजनाओं ने बदल दी पूरी तस्वीर45% घटा हाईवे निर्माण, पश्चिम एशिया संकट और बिटुमन की कमी बनी बड़ी वजहनई ईपीएफ योजना में बदला कायदा क्या है नुकसान और क्या है फायदा?IT Funds: जुलाई की रिकॉर्ड तेजी के बीच निवेशकों ने निकाला पैसा, मुनाफावसूली या रणनीति में बदलावMaruti Suzuki: रिकॉर्ड बिक्री से राजस्व चमका, लेकिन मार्जिन पर बढ़ती लागत का दबावEditorial: तेल, महंगाई और वैश्विक संकट के बीच ब्याज दरों पर विराम के आसारRBI की ‘इंतजार करो और देखो’ की रणनीति, ब्याज दरें स्थिर रहने के आसारजेनज़ी ने उजागर की खामी क्या लाभ ले पाएगा विपक्ष?

बैंकों को ब्याज दरों में कमी करनी चाहिए: भोई

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 1:41 AM IST

मंदी से निपटने के लिए ब्याज दरों में और कमी करने का फैसला बैंकों को करना चाहिए। 

केन्द्र सरकार अपनी वित्त नीति में सुधार करके मंदी से निपटने के और कदम उठा सकती है लेकिन मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अब अपनी मौद्रिक नीति में ज्यादा बदलाव नहीं कर सकता है।
भोई ने कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट के कारण भारत में भी पैदा हुए आर्थिक संकट से निपटने के लिए आरबीआई ने पिछले कुछ महीनों में अपनी मौद्रिक नीतियों में काफी बदलाव करके बाजार में तरलता प्रदान की है।
बाजार में तरलता की समस्या न खड़ी हो इसके लिए केन्द्रीय बैंक ने पिछले तीन महीनों में लगभग चार लाख करोड़ रुपये बाजार में उतारने की व्यवस्था भी की हैं। लेकिन अब आरबीआई की मौद्रिक नीति में ज्यादा बदलाव नहीं किये जा सकते हैं।
भोई ने कहा कि हांलाकि बैंकों को ब्याज दरों में अभी और कमी करनी चाहिए। ब्याज दरों में कमी सभी तरह की ब्याजों में होनी चाहिए। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार वित्त नीति में बदलाव करके बाजार के लिए कुछ पैकेज दे सकती है जैसा कि सरकार ने अभी कुछ दिनों पहले किया भी है।
मौद्रिक नीतियों में बदलाव से लगभग इनकार किये जाने और गेंद केन्द्र सरकार के पाले में फेंकने पर अर्थशास्त्री चन्द्र मोहन जोशी ने कहा कि अंतरिम बजट ने भी उद्योग जगत को निराश किया है और अब चुनाव नजदीक होने की वजह से सरकार ज्यादा कुछ कर भी नहीं पाएंगी। लगभग अगले 6 महीने तक स्थिति ज्यों का त्यों बनी रह सकती है।

Advertisement
First Published - February 19, 2009 | 9:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement