भारत की खुदरा महंगाई दर मार्च में गिरकर 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वस्तुओं की श्रेणी में कीमत का दबाव कम होने और ज्यादा आधार की वजह से सरकार को बहुप्रतीक्षित राहत मिली है। भारत का फैक्टरी उत्पादन भी कम आधार के कारण तेजी से बढ़कर फरवरी में 3 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 5.66 प्रतिशत रही है जो फरवरी में 6.44 प्रतिशत थी।
खाद्य, ईंधन, आवास और सेवा की कीमतों में लगातार गिरावट के कारण 2023 में पहली बार प्रमुख महंगाई दर गिरकर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय 6 प्रतिशत ऊपरी सीमा के नीचे आई है।
वहीं औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार पर मापा जाने वाला फैक्टरी उत्पादन फरवरी में बढ़कर 5.6 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो जनवरी में 5.5 प्रतिशत बढ़ा था। मुख्य रूप से अनुकूल आधार के असर और खनन (4.6 प्रतिशत), विनिर्माण (5.3 प्रतिशत) और बिजली (8.2 प्रतिशत) क्षेत्रों में वृद्धि के कारण औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है।
खाद्य महंगाई दर मार्च में गिरकर 4.79 प्रतिशत रह गई है, जो फरवरी में 5.95 प्रतिशत थी। खासकर मोटे अनाज की महंगाई दर में गिरावट (15.27 प्रतिशत) आई है। मांस व मछली की कीमतें घटी (-1.42 प्रतिशत)हैं। साथ ही दूध (9.31 प्रतिशत) और तेल (-7.86 प्रतिशत) कीमतें भी पहले की तुलना में कम हुई हैं।
बहरहाल मार्च में अंडे (4.41 प्रतिशत), दलहन (4.33 प्रतिशत), फलों (7.55 प्रतिशत) और सब्जियों की कीमत बढ़ी है।
प्रमुख महंगाई में खाद्य व ईंधन नहीं होता, यह मार्च में 6 प्रतिशत से नीचे है क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन, शिक्षा और पर्सनल केयर जैसी सेवाओं में गिरावट आई है।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि हाउसिंग को छोड़ दें तो मार्च 2023 में सीपीआई महंगाई में क्रमिक आधार पर व्यापक रूप से गिरावट आई है। इससे नीतिगत दर स्थिर रखने के रिजर्व बैंक के फैसले को बल मिला है।
बैंक आफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी मुख्य रूप से सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर खर्च और ऑटोमाबाइल में बढ़ी मांग के कारण रसायन, गैर धातु खनिजों, मूल धातुओं और वाहन क्षेत्र की वजह से हुई है।