भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने मौजूदा भूराजनीतिक घटनाक्रमों और उसके वित्तीय बाजार पर प्रभाव का शुक्रवार को आकलन किया। यह जानकारी केंद्रीय बैंक ने बयान में दी।
पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद भारत के केंद्रीय बैंक की पहली बोर्ड बैठक हुई। तेल के दाम बढ़ गए हैं। आयात के लिए डॉलर की मांग बढ़ गई है और रुपया दबाव में आ गया है। इससे पहले बोर्ड की बैठक नई दिल्ली में 23 फरवरी को हुई थी। भारतीय रुपया शुक्रवार को गिरकर सबसे निचले स्तर 93.72 पर बंद हुआ। रुपया मार्च में 2.92 प्रतिशत गिर गया।
बयान के अनुसार, ‘बोर्ड ने उभरती वैश्विक व घरेलू आर्थिक परिदृश्य का आकलन किया। इसके अलावा बोर्ड ने बदलते भूराजनीतिक घटनाक्रमों व इसके वित्तीय बाजार पर प्रभाव और उससे संबंधित चुनौतियों का भी आकलन किया।’ तेल की कीमतों में उछाल और रुपये के अवमूल्यन से केंद्रीय बैंक के लिए मौद्रिक नीति समिति के लंबे समय तक कम ब्याज दर के सिद्धांत को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।