वित्त वर्ष 27 की अप्रैल-जून तिमाही में प्रवासी भारतीयों की जमा राशि की आवक 23.24 प्रतिशत घटकर 2.78 अरब डॉलर रह गई जबकि यह राशि वित्त वर्ष 26 की इस अवधि में 3.61 अरब डॉलर थी। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से मिली है।
जून, 2026 के अंत तक प्रवासी भारतीयों की कुल बकाया जमा राशि 168.51 अरब डॉलर थी। यह बकाया राशि मई, 2026 में 165.96 अरब डॉलर और जून, 2025 में 168.33 अरब डॉलर थी।
रिजर्व बैंक ने अपने बुलेटिन में कहा, ‘प्रवासी भारतीयों की कुल आवक जमा राशि बीते महीने की तुलना में जून में सुधरी। नीतिगत उपायों के तहत फॉरन करेंसी नॉन रेजिडेंट-बैंक (एफसीएनआर – बी) जमा में मुख्य तौर पर वृद्धि के कारण प्रवासी भारतीयों की कुल आवक राशि में वृद्धि हुई। इससे भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार सहज स्थिति में पहुंच गया।
प्रवासी जमा योजनांओं में फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) (एफसीएनआर(बी)), नॉन-रेसिडेंट एक्सटर्नल (एनआरई) और नॉन-रेसिडेंट ऑर्डिनरी (एनआर) हैं। वित्त वर्ष 27 की अप्रैल-जून अवधि के दौरान एफसीएनआर (बी) जमा में आवक 1.73 अरब डॉलर रही जबकि यह एक साल पहले की इस अवधि में 1.77 अरब डॉलर थी। जून में एफसीएनआर (बी) खातों में बकाया राशि 35.49 अरब डॉलर थी जबकि यह जून, 2025 में 35.85 अरब डॉलर थी।
एफसीएनआर (बी) खाता ग्राहकों को भारत में आसानी से बदली जा सकने वाली विदेशी मुद्राओं में एक से पांच साल की अवधि के लिए सावधि बचत की सुविधा देता है। दरअसल, यह खाता विदेशी मुद्रा में रखा जाता है, इसलिए यह जमा अवधि के दौरान मुद्रा के उतार-चढ़ाव से कोष की सुरक्षा करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के 5 जून, 2026 को घोषित नीतिगत उपायों के बाद प्रवासी भारतीयों की जमा राशि और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) राशियों में वृद्धि हुई। इसके परिणामस्वरूप , 8 जून से 21 अगस्त, 2026 के दौरान एफसीएनआर (बी) में 65.4 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी आवक देखी गई। इस दौरान ओवरसीज़ फ़ॉरेन करेंसी बॉरोइंग (ओएफसीबी) में 4.9 अमेरिकी डॉलर और ईसीबी में 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर की आवक दर्ज हुई।
वित्त वर्ष 27 की अप्रैल-जून अवधि के दौरान एनआरई जमा में 14.1 करोड़ डॉलर की आवक दर्ज हुई जबकि यह राशि एक साल पहले इसी अवधि में 1.99 अरब डॉलर थी। एनआरई जमा की बकाया राशि जून, 2026 में 98.76 अरब डॉलर थी।