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5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से चूका भारत

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Last Updated- December 11, 2022 | 1:45 PM IST

भारत की अर्थव्यवस्था 2021-22 में विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बन पाएगी। यह ब्रिटेन से करीब 10 अरब डॉलर पीछे है। लेकिन अगले साल तक भारत 27 अरब डॉलर से ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा। 2025-26 तक भारत की अर्थव्यवस्था जर्मनी के बराबर होगी, जो विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2027-28 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जब यह अनुमानित रूप से जापान से बड़ा होगा। आईएमफ द्वारा जारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
भारत की अर्थव्यवस्था 2026-27 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की नहीं होगी, जैसा कि वित्त मंत्रालय ने उम्मीद जताई थी, लेकिन इसके करीब होगी। यह इस साल तक 4.94 लाख करोड़ डॉलर होगी। उसके बाद के साल में भारत की अर्थव्यवस्था 5.36 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े पर पहुंच जाएगी, जो जापान के 5.17 लाख करोड़ डॉलर से बड़ी होगी।
इस साल भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। फंड के प्रकाशन मुताबिक 2021-22 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 3.18 लाख करोड़ डॉलर था, जबकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 2021 में 3.19 लाख करोड़ डॉलर था। उल्लेखनीय है कि भारत की अर्थव्यवस्था के आकार की गणना वित्त वर्ष के आधार पर की जाती है, जो अप्रैल से मार्च तक चलता है। वहीं ज्यादातर अन्य अर्थव्यवस्थाओं की गणना कैलेंडर वर्ष पर आधारित है।
इसके पहले ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि भारत 2021-22 की चौथी तिमाही में ब्रिटेन से आगे निकल जाएगा। इसमें विश्व बैंक के आंकड़ों को आधार बनाया गया था। बहरहाल यह तुलना तिमाही आधार पर थी, वार्षिक आधार पर नहीं। आईएमएफ द्वारा डब्ल्यूईओ को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 3.47 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी, जबकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 3.2 लाख करोड़ डॉलर की होगी।
2025-26 तक भारत की अर्थव्यवस्था 4.55 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी, जितनी बड़ी जर्मनी की अर्थव्यवस्था है। 2021-22 में जर्मनी की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में 1 लाख करोड़ डॉलर बड़ी थी। दरअसल अगर आंकड़ों को लगभग में न देखें, तो भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में जर्मनी की अर्थव्यवस्था की तुलना में 1 अरब डॉलर बड़ी होगी।
लेकिन किसी भी अनुमान लगाने वाले के लिए 1 अरब डॉलर की राशि बहुत छोटी है, जिसके आधार पर स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता है। कुछ लोगों का यह तर्क हो सकता है कि क्रय शक्ति में अंतर (पीपीपी) अर्थव्यवस्था के आकार की गणना में बेहतर तरीका हो सकता है। पीपीपी में देश में आजीविका की लागत शामिल होती है, और इसमें मुद्रा को डॉलर में तब्दील किया जाता है।  

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First Published - October 13, 2022 | 10:20 PM IST

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