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अमेरिकी टैरिफ के चलते भारतीय निर्यातकों ने दूसरे बाजारों की ओर किया रुख, 6 महीनों में 24 देशों से बढ़ा निर्यात

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सितंबर में अमेरिका को निर्यात 11.93 फीसदी गिरकर 5.46 अरब डॉलर रह गया, जिसका मुख्य वजह वाशिंगटन का हाई टैरिफ था

Last Updated- October 19, 2025 | 6:45 PM IST
Trade
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के निर्यातक अब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में 24 देशों में निर्यात बढ़ा है। लेकिन अमेरिका में सितंबर महीने में ऊंचे टैरिफ की वजह से गिरावट आई। सरकारी आंकड़ों से यह साफ हो रहा है कि बाजार को फैलाने की रणनीति काम कर रही है।

ये 24 देश हैं: कोरिया, यूएई, जर्मनी, टोगो, मिस्र, वियतनाम, इराक, मैक्सिको, रूस, केन्या, नाइजीरिया, कनाडा, पोलैंड, श्रीलंका, ओमान, थाईलैंड, बांग्लादेश, ब्राजील, बेल्जियम, इटली और तंजानिया। अप्रैल से सितंबर 2025-26 तक इन देशों में कुल निर्यात 129.3 अरब डॉलर रहा। यह पिछले साल की तुलना में बढ़ा है। भारत के कुल निर्यात का 59 फीसदी हिस्सा इन्हीं देशों से आया।

कुल मिलाकर, अप्रैल से सितंबर तक निर्यात 3.02 फीसदी बढ़कर 220.12 अरब डॉलर हो गया। आयात भी 4.53 फीसदी बढ़ा और 375.11 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे व्यापार घाटा 154.99 अरब डॉलर का रहा।

Also Read: ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर तेजी से बढ़ी बातचीत’, बोले गोयल- किसानों के हित से कोई समझौता नहीं

अमेरिका का असर और नई राहें

हालांकि, 16 देशों में निर्यात घटा है। ये देश भारत के कुल निर्यात के 27 फीसदी हिस्से यानी 60.3 अरब डॉलर के बराबर हैं। एक निर्यातक ने बताया कि अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। इससे अमेरिका को निर्यात पर बुरा असर पड़ा। लेकिन निर्यातक अब अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट जैसे इलाकों में ज्यादा जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला आने वाले महीनों में भी चलेगा।

सितंबर में अमेरिका को निर्यात 11.93 फीसदी गिरकर 5.46 अरब डॉलर रह गया। वजह वाशिंगटन का हाई टैरिफ था। अप्रैल से सितंबर तक अमेरिका को निर्यात 13.37 फीसदी बढ़कर 45.82 अरब डॉलर हुआ।

वहीं, आयात 9 फीसदी बढ़कर 25.6 अरब डॉलर पहुंचा। अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। दोनों देश अब द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात कर रहे हैं। इससे दोतरफा व्यापार बढ़ सकता है। 2024-25 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।

निर्यातक अब नए बाजारों की तलाश में जुटे हैं। अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं ज्यादा हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि विविधीकरण की यह रणनीति कामयाब हो रही है। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है। लेकिन टैरिफ जैसे मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है।

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First Published - October 19, 2025 | 6:29 PM IST

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