सोमवार को जारी रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में भारत का करंट अकाउंट सरप्लस (चालू खाता अधिशेष) 7.1 अरब डॉलर रहा, जो कि GDP का 0.7 फीसदी है। इससे पिछले साल, यानी 2024-25 की चौथी तिमाही में यह सरप्लस 13.7 अरब डॉलर था, जो GDP का 1.4 फीसदी था।
हालांकि, अगर पूरे वित्त वर्ष की बात करें, तो करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) 25.2 अरब डॉलर रहा, जो GDP का 0.6 फीसदी है। इसकी तुलना में साल 2024-25 के दौरान यह घाटा 22.9 अरब डॉलर था, जो कि उस समय भी GDP का 0.6 फीसदी ही था।
साल 2025-26 की चौथी तिमाही के दौरान भारत के ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ (भुगतान संतुलन) के उतार-चढ़ाव पर RBI के आंकड़ों के अनुसार, नेट सर्विसेज रिसीट्स (सेवाओं से होने वाली शुद्ध कमाई) एक साल पहले के 53.3 अरब डॉलर से बढ़कर चौथी तिमाही (Q4 2025-26) में 60.4 अरब डॉलर हो गई। सालाना आधार पर कंप्यूटर सर्विसेज और अन्य बिजनेस सर्विसेज जैसे बड़े सेक्टर्स में सर्विसेज एक्सपोर्ट (सेवा निर्यात) में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दूसरी ओर, इस साल की चौथी तिमाही (Q4 2025-26) में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) बढ़कर 83.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q4 2024-25) में 59.3 अरब डॉलर था।