facebookmetapixel
Advertisement
सेवा क्षेत्र ने संभाली अर्थव्यवस्था की रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 5 साल में सबसे कमजोरऑगमोंट एंटरप्राइजेज आईपीओ में आज से निवेश का मौका, एक्सपर्ट ने दी सब्सक्राइब करने की सलाह; GMP 38%एक्सप्लेनर: सिर्फ 2 सेकंड में 88 ऑर्डर! नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में कैसे हुई हेरफेर? समझें पूरा मामलाकोलगेट-पामोलिव इंडिया के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव: मनीष आनंदानी होंगे नए MD & CEOडिफेंस सेक्टर में बना निवेश मौका! इन PSU शेयरों पर ब्रोकरेज बुलिश, कहा – BUYजेपी मॉर्गन की यूनिट पर SEBI का तगड़ा एक्शन, ट्रेडर्स के लिए मानी जा रही बड़ी चेतावनी7% पर मिल रहा होम लोन; आवेदन से पहले चेक कर लें SBI, HDFC, ICICI समेत प्रमुख बैंकों की ब्याज दरेंटाटा मोटर्स की कारें होंगी महंगी, 1 सितंबर से 25000 रुपये तक बढ़ेंगे दामसुरक्षित निवेश बना सोने-चांदी की तेजी का कारण, सोना ₹1,205 मजबूत, चांदी ₹1,745 चमकीईरान पर ट्रंप की धमकी का तेल बाजार पर असर, कच्चा तेल 2% से ज्यादा उछला, ब्रेंट 94 डॉलर के करीब पहुंचा

चालू खाते के घाटे में इजाफा

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 2:36 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा आज जारी आंकड़ों से पता चलता है​ कि जून तिमाही में भारत के चालू खाते के घाटे में खासी वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून के दौरान देश का चालू खाते का घाटा 23.9 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 2.8 फीसदी हो गया। इससे पिछली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2022 के दौरान चालू खाते का घाटा 13.4 अरब डॉलर था, जो जीडीपी का करीब 1.5 फीसदी रहा था।
भारत ने पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2021 के बीच चालू खाते का अधिशेष रहा था, जो 6.6 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 0.9 फीसदी था। पिछले पूरे वित्त वर्ष के लिए चालू खाते का घाटा 38.7 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 1.2 फीसदी रहा था।
इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए चालू खाते का घाटा विश्लेषकों के अनुमान से कम है। विश्लेषकों ने अनुमान जाहिर किया था कि तिमाही के दौरान चालू खाते का घाटा जीडीपी का करीब 3 फीसदी हो सकता है।
आरबीआई ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा बढ़ने के कारण चालू खाते के घाटे में वृद्धि हुई है। तिमाही के दौरान वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 68.6 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में 54.5 अरब डॉलर था। साथ ही निवेश आय भुगतान देश से बाहर जाने के कारण भी घाटा बढ़ा।’
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण 2022 में भारत के आयात बिल में तेजी दिखने लगी थी। युद्ध के कारण दुनिया भर में जिंस कीमतों में भारी तेजी दर्ज की गई थी। अप्रैल से अगस्त की अव​​धि में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 125.22 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले की समान अव​धि में 53.78 अरब डॉलर रहा था। डॉलर के मुकाबले रुपये में इस साल अब ​तक 9.2 फीसदी गिरावट आई है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान शुद्ध सेवा प्रा​प्तियों में तिमाही और सालाना दोनों आधारों पर वृद्धि दर्ज की गई। आरबीआई ने कहा कि कंप्यूटर और कारोबारी सेवाओं का निर्यात बढ़ने से शुद्ध सेवा प्रा​प्तियों में वृद्धि हुई। सेवाओं के निर्यात में 35.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रिजर्व बैंक ने कहा कि इसे मुख्य तौर पर कंप्यूटर, कारोबार, परिवहन एवं यात्रा सेवाओं में व्यापक वृद्धि से रफ्तार मिली। विदेश में कार्यरत भारतीय लोगों द्वारा प्रे​षित रकम तिमाही के दौरान 22.6 फीसदी बढ़कर 25.6 अरब डॉलर हो गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘हालांकि व्यापार घाटा बढ़ गया है, लेकिन सॉफ्टवेयर और प्रेषण से काफी सहारा मिला है, जिसमें क्रमशः 30.7 अरब डॉलर और 23 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह देखा गया है।’ उन्होंने कहा कि ये आंकड़े पिछली 4 तिमाहियों के मुकाबले अधिक थे और ऐसे समय पर आए, जब यूक्रेन युद्ध अपने चरम पर था।
 

Advertisement
First Published - September 29, 2022 | 10:22 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement