facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

बुरी खबर! प्राइवेट सेक्टर के CAPEX को लेकर CRISIL का बड़ा खुलासा

Advertisement

“उनकी (कंपनियों की) निवेश करने की क्षमता इस समय निवेश करने की इच्छा से मेल नहीं खाती।”

Last Updated- March 07, 2025 | 6:22 AM IST
BS Manthan
CRISIL के मुख्य अर्थशास्त्री डी के जोशी

घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Rating Agency CRISIL) ने कहा कि भारतीय उद्योग जगत की लाभप्रदता दशक के उच्चतम स्तर पर होने के बावजूद निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (Capital expenditure) में सतत वृद्धि की उम्मीद नहीं है। एजेंसी ने कहा कि जिंस कीमतों में नरमी के कारण भारतीय उद्योग जगत की लाभप्रदता अगले वित्त वर्ष (2025-26) में लगातार तीसरे वर्ष बढ़ने वाली है।

बैंकिंग एवं वित्त तथा तेल एवं गैस क्षेत्र की कंपनियों को छोड़कर 800 कंपनियों के विश्लेषण से पता चलता है कि अगले वित्त वर्ष में कर-पूर्व लाभ मार्जिन बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो जाएगा। सरकार पिछले कुछ वर्षों से अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा निवेश कर रही है, तथा कॉरपोरेट पूंजीगत व्यय में भी सुधार की मांग उठ रही है। हालांकि, नई क्षमताएं बनाने के लिए निवेश करने के बजाय भारतीय उद्योग जगत ने कर्ज चुकाने और अन्य उपायों में धन लगाया है, जबकि क्षमता उपयोग का स्तर ऊंचा है।

CRISIL के मुख्य अर्थशास्त्री (Chief Economist) डी के जोशी ने कहा, “उनकी (कंपनियों की) निवेश करने की क्षमता इस समय निवेश करने की इच्छा से मेल नहीं खाती।” उन्होंने कहा कि अस्थिर वैश्विक माहौल के कारण अनिश्चितताएं तथा घरेलू मांग में असमानता, ऐसे कारक हैं जो कंपनियों को निवेश करने से रोक रहे हैं।

एजेंसी ने कहा कि भारतीय कंपनियों की आय वृद्धि अगले वित्त वर्ष में बढ़कर आठ प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जबकि चालू वित्त वर्ष (2024-25) में इसके छह प्रतिशत रहने का अनुमान है। एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया कि यह वृद्धि मूल्य वृद्धि के कारण नहीं बल्कि अधिक मात्रा के कारण होगी।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

CRISIL, ICRA, S&P तीनों ने कहा, 5 साल में भारत का ये बिजनेस होगा 31 लाख करोड़ रुपये का

Budget: PWC, EY, Deloitte का एनालिसिस, Custom duty पर बजट में हो सकता है बड़ा एलान, कंपनियों के शेयर बनेंगे राकेट?

BS Manthan 2025: Post-Covid हमने Digital Growth तो तेजी से की, लेकिन Reforms में धीमे रहे- डीके जोशी, CRISIL

 

Advertisement
First Published - March 6, 2025 | 8:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement