facebookmetapixel
Advertisement
ज्यादा खर्च हो गया? घबराने की जरूरत नहीं, इन आसान तरीकों से फिर पटरी पर लाएं अपनी आर्थिक स्थितिदेश में डॉलर की बंपर आवक! RBI की स्वैप स्कीम से आए $7.28 करोड़, जानें बैंकों पर क्या होगा असरनौकरी छोड़ने के बाद भी EPF खाते पर मिलेगा ब्याज? समझें उम्र व रिटायरमेंट से जुड़ा EPFO का पूरा नियमबिना कमाई वाले छात्रों को भी मिलेगा ₹25 लाख का लाइफ कवर, स्टूडेंट्स के लिए लॉन्च हुआ खास टर्म प्लानशेयरधारकों की बल्ले-बल्ले! 1 शेयर पर 1 फ्री बोनस शेयर दे रही यह कंपनी; 24 अगस्त तय हुई रिकॉर्ड डेटअगले हफ्ते 50 से अधिक कंपनियां निवेशकों को बांटेंगी मुनाफा, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकामानसून में बाढ़ और भूस्खलन से मकान को हुआ नुकसान? समझें होम इंश्योरेंस कैसे बचाएगा आपका पैसाक्या UPI पर नहीं लगेगा कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज? 2017 के कड़े नियम को ढाल बनाने की तैयारी में जुटा RBIदिल्ली में बदला मौसम, बारिश ने दी गर्मी से राहत; कई राज्यों में भारी बौछार का अलर्टविकसित भारत के लिए युवाओं को कौशल और डिजिटल ट्रेनिंग देने पर जोर

GST कानून से बाहर किए जाएंगे IPC के दायरे में आने वाले अपराध

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 11:09 AM IST

माल एवं सेवा कर (GST) अधिनियम को करदाताओं के लिए और आसान बनाने के लिए सरकार ऐसे दंडात्मक अपराधों को इससे हटाने पर विचार कर रही है जो भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code (IPC) के दायरे में पहले से ही आते हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। 

यह प्रस्ताव GST कानून के दायरे से कुछ अपराधों को बाहर करने की कवायद के तहत लाया गया है और GST Council की अगली बैठक में इसे रखे जाने की संभावना है।

प्रस्ताव को जीएसटी परिषद की मंजूरी मिल जाती है तो वित्त मंत्रालय जीएसटी कानून में संशोधन का प्रस्ताव देगा जिसे अगले महीने से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा। 

एक अधिकारी ने बताया, ‘जीएसटी कानून के दायरे से अपराध को बाहर करने की कवायद के तहत Law committee ने इसकी धारा 132 में बदलावों को अंतिम रूप दे दिया है।’ 

उन्होंने बताया कि जो अपराध भारतीय दंड संहिता के दायरे में आते हैं उन्हें जीएसटी कानून से हटा दिया जाएगा। कानून में संशोधन को संसद से मंजूरी मिलने के बाद राज्यों को भी अपने जीएसटी कानून बदलने पड़ेंगे। 

टैक्स विशेषज्ञों ने बताया कि शुरुआत में फर्जी बिल के अपराधों को दायरे से बाहर किया जा सकता है। 

AMRG & Associates में वरिष्ठ पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि ऐसा अनुमान है कि फर्जी बिल जारी करने और इन्हें स्वीकार करने से जुड़े अपराध भारतीय दंड संहिता के दायरे में लाए जा सकते हैं। 

Advertisement
First Published - November 20, 2022 | 4:24 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement