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नीदरलैंड को पीछे छोड़ चीन बना फरवरी में भारत का तीसरा बड़ा निर्यात गंतव्य

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अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात केंद्र बना रहा। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात का स्थान है। फरवरी में इन दोनों देशों में होने वाला निर्यात कम हुआ है।

Last Updated- March 17, 2026 | 9:48 PM IST
India Export

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात केंद्र चीन बन गया है और नीदरलैंड पीछे छूट गया है। फरवरी महीने में भारत के शीर्ष 10 निर्यात केंद्रों में से 7 देशों में निर्यात घटा है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस महीने में कुल निर्यात 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया है। भारत के कुल वस्तु निर्यात में इन 10 देशों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है।

फरवरी में चीन को होने वाला निर्यात 32.4 प्रतिशत बढ़कर 1.67 अरब डॉलर हो गया है। खासकर कम आधार के कारण इतनी वृद्धि नजर आ रही है। फरवरी महीने में वस्तु निर्यात के अलग-अलग आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और समुद्री उत्पादों ने भारत के निर्यात में अहम भूमिका निभाई है।

नीदरलैंड को होने वाला निर्यात फरवरी में 31.3 प्रतिशत घटकर 1.29 अरब डॉलर रह गया है। यह देश यूरोप को होने वाले वस्तु निर्यात का मुख्य प्रवेश द्वार है और पिछले 3 साल से भारत से रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यात का प्रमुख केंद्र रहा है। उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा कि रूस से भारत में रिफाइनिंग के लिए कच्चा तेल कम आना इस तरह की शिपमेंट में गिरावट की प्रमुख वजह हो सकती है जिसके कारण नीदरलैंड को होने वाला निर्यात कम हुआ है।

अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात केंद्र बना रहा। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात का स्थान है। फरवरी में इन दोनों देशों में होने वाला निर्यात कम हुआ है। अमेरिका को होने वाला निर्यात फरवरी में करीब 13 प्रतिशत कम होकर 6.89 अरब डॉलर हो गया है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात को होने वाला निर्यात 0.3 प्रतिशत घटकर 3.25 अरब डॉलर रह गया है।

निर्यातकों का कहना है कि संयुक्त अरब अमीरात को होने वाले निर्यात में मामूली कमी एक बार की घटना हो सकती है, जबकि शुल्क की अनिश्चितता के कारण अमेरिका को होने वाला निर्यात कम हुआ है। इसके अलावा अक्टूबर से निर्यात कमोबेश समान बना रहा, जो 6.3 से 6.9 अरब डॉलर के बीच है। निर्यात में कमी की एक वजह यह भी हो सकती है कि पिछले साल अधिक शुल्क लगने के अनुमान के कारण निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई थी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अजय सहाय ने कहा, ‘अमेरिकी शुल्क घटकर 10 प्रतिशत होने (24 फरवरी से) के कारण हम उम्मीद करते हैं कि निर्यात में तेजी आएगी। बहरहाल अनिश्चितता जारी है, क्योंकि अमेरिका ने धारा 301 (बी) के तहत जांच शुरू कर दी है, साथ ही वह भारत सहित कुछ देशों को निशाना बना रहा है।’ इसके अलावा जिन देशों को होने वाले निर्यात में कमी आई है, उनमें ब्रिटेन (-4.6 प्रतिशत), सऊदी अरब (-10.4 प्रतिशत), बांग्ला देश (-22.9 प्रतिशत), सिंगापुर (-13.6 प्रतिशत) शामिल हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि चीन के अलावा जर्मनी (4 प्रतिशत) और हॉन्गकॉन्ग (32.1 प्रतिशत) को होने वाला निर्यात बढ़ा है। कुल मिलाकर मार्च महीने में भी वस्तु निर्यात को लेकर चुनौती बनी रह सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ‘व्यापार में लॉजिस्टिक्स संबंधी व्यवधानों के कारण मार्च महीना व्यापार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण भी निर्यात प्रभावित होगा।’

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First Published - March 17, 2026 | 9:38 PM IST

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