शेयर बाजार में दूसरे तरह के निवेशकों के मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के खरीदारी के फैसलों का ज्यादा असर होता है। जिन शेयरों में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, उनकी कीमत उन शेयरों के मुकाबले ज्यादा बढ़ी, जिनमें उन्होंने अपनी हिस्सेदारी घटाई। जून में समाप्त तिमाही में एफपीआई ने 756 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और इन शेयरों की कीमत में औसतन 39.57 फीसदी का बदलाव आया। उन्होंने 990 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई और इन शेयरों की कीमत में औसतन 23.71 फीसदी का परिवर्तन देखा गया।
निजी प्रवर्तक, इक्विटी मालिकों में दूसरी सबसे तेजतर्रार श्रेणी के तौर पर उभरे। जिन कंपनियों में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, उनके शेयर की औसत कीमत में 35.67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और जिनमें हिस्सेदारी घटाई, उनमें यह बढ़ोतरी 32.61 फीसदी रही। शेयर की कीमत में बदलाव पर खुदरा निवेशकों का असर सबसे कम रहा। जिन कंपनियों में उन्होंने हिस्सेदारी घटाई, उनमें शेयर की औसत कीमत में बदलाव उन कंपनियों के मुकाबले 11.57 फीसदी ज्यादा था, जिनमें उन्होंने हिस्सेदारी खरीदी थी।
लेकिन एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में एफपीआई की हिस्सेदारी 31 मार्च, 2026 के 16.12 फीसदी से घटकर 30 जून, 2026 को 15.88 फीसदी रह गई, जो 14 साल का निचला स्तर है।