facebookmetapixel
Advertisement
EV खरीदने वालों की कतार लंबी! जुलाई में इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री 88% बढ़ी, कंपनियां मांग पूरी करने में नाकामStocks to Watch Today: रिलायंस-रोल्स रॉयस की बड़ी डील से लेकर BEML के ऑर्डर तक, आज इन शेयरों में दिख सकता है एक्शनविकास के अगले चरण के लिए भूमि व कारोबारी माहौल में सुधार जरूरी: प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु में सरकार के 100 दिन, एमजीआर की याद दिला रहे विजयपश्चिम बंगाल में कारोबार को बढ़ावा, नई सरकार के पहले 100 दिन में निवेश पर जोर1991 के आ​र्थिक सुधारों से उद्योग को मिला प्रतिस्पर्धा का भरोसा, औद्योगिक और व्यापार नीति में तालमेल बिठाना जरूरीऑफर फॉर सेल के जरिये जुटाई गई रकम में उफान, LIC का अहम योगदानQ1 Results: लिस्टेड कंपनियों के मुनाफे में 16% की तेज बढ़त, BFSI और मेटल सेक्टर का बड़ा योगदानRBI के फैसले से बैंकों में हलचल, FCNR(B) जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ीबाजार हलचल: प्री-आईपीओ शेयर, नया SLB कॉन्ट्रैक्ट और UPI नियम पर नजर

FPI की खरीदारी वाले शेयरों ने दिया बेहतर रिटर्न, फिर भी हिस्सेदारी 14 साल के निचले स्तर पर

Advertisement

जून में समाप्त तिमाही में एफपीआई ने 756 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और इन शेयरों की कीमत में औसतन 39.57 फीसदी का बदलाव आया

Last Updated- August 09, 2026 | 10:24 PM IST
FPI
प्रतीकात्मक तस्वीर

शेयर बाजार में दूसरे तरह के निवेशकों के मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के खरीदारी के फैसलों का ज्यादा असर होता है। जिन शेयरों में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, उनकी कीमत उन शेयरों के मुकाबले ज्यादा बढ़ी, जिनमें उन्होंने अपनी हिस्सेदारी घटाई। जून में समाप्त तिमाही में एफपीआई ने 756 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और इन शेयरों की कीमत में औसतन 39.57 फीसदी का बदलाव आया। उन्होंने 990 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई और इन शेयरों की कीमत में औसतन 23.71 फीसदी का परिवर्तन देखा गया।

निजी प्रवर्तक, इक्विटी मालिकों में दूसरी सबसे तेजतर्रार श्रेणी के तौर पर उभरे। जिन कंपनियों में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, उनके शेयर की औसत कीमत में 35.67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और जिनमें हिस्सेदारी घटाई, उनमें यह बढ़ोतरी 32.61 फीसदी रही। शेयर की कीमत में बदलाव पर खुदरा निवेशकों का असर सबसे कम रहा। जिन कंपनियों में उन्होंने हिस्सेदारी घटाई, उनमें शेयर की औसत कीमत में बदलाव उन कंपनियों के मुकाबले 11.57 फीसदी ज्यादा था, जिनमें उन्होंने हिस्सेदारी खरीदी थी।

लेकिन एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में एफपीआई की हिस्सेदारी 31 मार्च, 2026 के 16.12 फीसदी से घटकर 30 जून, 2026 को 15.88 फीसदी रह गई, जो 14 साल का निचला स्तर है।

Advertisement
First Published - August 9, 2026 | 10:24 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement