कर्ज के भंवरजाल से निकलने की कोशिश में जुटी वॉकहार्ट को एक और झटका लगा, जब भारतीय पेटेंट कार्यालय ने हेपेटाइटिस-सी की दवा पेगेसिस पर रॉश के पेटेंट अधिकार को बरकरार रखा।
रॉश की इस बायोटेक दवा के पेटेंट पर पिछले महीने दिए गए पेटेंट कार्यालय के फैसले के विरुद्ध दायर वॉकहार्ट और मुंबई की सिविल सोसाइटी संस्था संकल्प पुनर्वास ट्रस्ट के विरोध को कार्यालय ने खारिज कर दिया।
पेटेंट कानून मे हुए 4 साल पहले के संशोधन के बाद भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट अधिकार पाने वाली पेगेसिस ही पहली दवाई थी। पेटेंट कार्यालय के इस निर्णय के साथ ही पेगेसिस से मिलती-जुलती निम् लागत की दवा तैयार करने की वॉकहार्ट की उम्मीदें अब खत्म हो गई हैं।
सिविल सोसाइटी के लिए दुख की बात यही होगी कि सस्ते विकल्प तक उनकी पहुंच प्रभावित होगी। हेपेटाइटिस से पीड़ित एचआईवी मरीजों के लिए यह दवा काफी कारगर है। लॉयर्स कलेक्टिव नामक वकीलों की संस्था जो इस पेटेंट का विरोध कर रही थी, ने कहा कि इस निर्णय से इस दवा पर रॉश का एकाधिकार हो जाएगा।
इस संस्था ने कहा, ”हेपेटाइटिस-सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को पेगेसिस की 6 महीने की डोज के लिए करीब 4.36 लाख रुपये (छूट के बाद 3.14 लाख) देना होता है। यही नहीं, पेगेसिस को रिबावरीन के साथ लेना होता है, जिसकी कीमत 47 हजार रुपये है।” रॉश और वॉकहार्ट ने इस मामले पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया।
रॉश के पेटेंट को जारी रखा पेटेंट कार्यालय ने
वॉकहार्ट का विरोध खारिज