ऐपल के लिए आईफोन बनाने वाली ताइवान की कंपनी विस्ट्रॉन ने आरोप लगाया कि बेंगलूरु के समीप उसके विनिर्माण संयंत्र में तोडफ़ोड़ और चोरी सोची-समझी साजिश थी। सूत्रों ने कहा कि विस्ट्रॉन इस पर विचार कर रही है कि कर्नाटक में अपना विस्तार जारी रखना है या नहीं।
विस्ट्रॉन बेंगलूरु के कोलार जिले में स्थित संयंत्र में आईओटी उत्पादों सहित आईफोन का विनिर्माण करती है। सूत्रों ने कहा कि उसने अगले साल के अंत तक 25,000 कर्मचारियों को नियुक्त करने की योजना बनाई है लेकिन अब इसमें मुश्किल हो सकती है।
विस्ट्रॉन के संयंत्र में फिलहाल 12,000 कर्मचारी हैं, जिनमें से केवल 1,200 कर्मचारी ही स्थायी हैं और अन्य को ठेके पर रखा गया है। थर्ड-पार्टी आईफोन विनिर्माता ने हाल ही में कर्नाटक में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 1,200 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी।
कंपनी ने बयान में कहा, ‘हमारे नरसापुरा संयंत्र की घटना से हमें गहरा सदमा लगा है। हम कानून का पालन करते हैं और संबंधित प्राधिकरणों को जांच में सहयोग कर रहे हैं। हमारे टीम सदस्यों की सुरक्षा और कल्याण हमेशा हमारी शीर्ष प्राथमिकता रही है।’
ऐपल ने कहा कि उसने इस मामले की जांच शुरू की है और टीम सदस्यों और ऑडिटरों को संयंत्र में भेजा गया है। ऐपल ने कहा, ‘हमारे पास टीम है और जल्द ही हम विस्ट्रॉन के भारतीय संयंत्र में विस्तृत जांच शुरू करेंगे। हमारी टीम स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और हम जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं।’
रविवार सुबह हजारों लोगों ने संयंत्र परिसर की खिड़कियों, एटीएम मशीनों, सीसीटीवी कैमरे, वाहनों तथा अन्य उपकरणों की तोड़-फोड़ शुरू कर दी। उनका आरोप था कि वेतन में कटौती की गई है और वेतन का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। कंपनी ने प्राथमिकी में कहा है कि इस घटना के दौरान करोड़ों रुपये के आईफोन और लैपटॉप की भी चोरी हुई है। कंपनी के अनुसार करीब 437 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस मामले में अब तक करीब 160 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कंपनी से जुड़े सूत्रों ने स्वीकार किया कि बकाया भुगतान में कुछ खामियां हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक काम नहीं करने वाले कई कर्मचारियों ने पूरा वेतन तथा ओवरटाइम का भुगतान अग्रिम देने की मांग कर रहे थे। मामले के जानकार एक शख्स ने कहा कि घटना से पहले हमने तेज आवाज सुनी जिसमें कहा जा रहा था कि रसम काफी तीखी है और एसी बहुत ठंडा है। कर्मचारियों ने कहा कि वे रोज 12 घंटे काम करते हैं जिनमें 8 घंटा नियमित और 4 घंटा ओवरटाइम है। कंपनी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वे हफ्ते में केवल चार दिन काम करते हैं।
जून से ही कंपनी नई नियुक्तियां कर रही थी और उसकी कर्मचारियों की संख्या 2,000 से बढ़कर अक्टूबर में 12,000 हो गई थी। भर्ती में शर्त थी कि दो साल पूरा करने वाले कर्मचारियों को कंपनी के रोल पर ले लिया जाएगा। बीते शुक्रवार को कर्मचारियों का एक समूह मानव संसाधन (एचआर) कर्मचारियों के साथ वेतन के मसले पर बहस करने लगा।
कंपनी ने उनसे सोमवार सुबह तक बकाया भुगतान करने का वादा किया उसके बाद रात की पाली वाले कर्मचारी परिसर से चले गए। लेकिन कुछ घंटे बाद ही अज्ञात लोगों का एक समूह रॉड और डंडे लेकर परिसर में घुस गया और तोड़-फोड़ करने लगा, जिसके बाद कई कर्मचारी भी उसमें शामिल हो गए। सूत्रों ने कहा कि उन्होंने खास तौर पर उस जगह को निशाना बनाया जहां लैपटॉप और फोन रखे जाते हैं।
कंपनी का यह आरोप भी है कि जिला प्रशासन ने इसमें तेजी नहीं दिखाई और पुलिस करीब दो घंटे बाद पहुंची जबकि अधिकारियों को पहले ही इसकी सूचना दी गई है।
राज्य सरकार ने कहा कि इस तरह की घटना से राज्य की छवि खराब होती है। राज्य के श्रम मंत्री एएस हेब्बार ने कहा, ‘हम सभी बकाया भुगतान कराना सुनिश्चित करेंगे लेकिन इस तरह की हिंसा से गलत संदेश जाता है कि कर्नाटक उद्योगों के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्ट्रॉन के कर्मचारियों की ओर से वेतन से संबंधित एक भी शिकायत श्रम विभाग के पास नहीं आई है।