मंदी को मात देने के लिए विप्रो कंज्यूमर केयर अब अपने रोशनी के कारोबार में फिर से जान फूंकने की कवायद में लगी हुई है। इस कारोबार को पिछली दो तिमाहियों से लगातार धीमी विकास रफ्तार का सामना करना पड़ा है।
कंपनी अब अस्पतालों, फार्मा और ग्रीन बिल्डिंग्स के क्षेत्र पर फोकस करने की योजना बना रही है। कंपनी को इन सेक्टरों पर मंदी की मार सबसे कम रहने की उम्मीद है। पारंपरिक रूप से विप्रो कमाई के लिए आईटीआईटीईएस सेक्टर और रिटेल कारोबार पर सबसे ज्यादा निर्भर रही है।
लेकिन मंदी की वजह से इन सेक्टरों की हालत फिलहाल पतली हो चुकी है। विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग के अध्यक्ष विनीत अग्रवाल का कहना है कि, ‘तीसरी तिमाही के दौरान कंज्यूमर केयर से लेकर फर्नीचर तक के हमारे कारोबार में ऊंर्जां ने जबरदस्त कमाई की है।
हालांकि, रोशनी के कारोबार में लगातार दूसरी तिमाही में हमारी विकास की रफ्तार धीमी रही है। वजह यह है कि ज्यादातर रियल एस्टेट परियोजनाएं मंदी की वजह से ठप पड़ी हुई हैं। आगे के लिए भी हमें इस सेक्टर से कुछ ज्यादा उम्मीद नहीं है। इस वजह से हम अब उन परियोजनाओं पर फोकस कर रहे हैं, जिन पर मंदी की मार ज्यादा पड़ने की उम्मीद नहीं है।’
ग्रीन बिल्डिंग सेगमेंट में विप्रो पहले ही खुद को एक मजबूत खिलाड़ी के तौर पर पेश कर चुकी है। मुल्क में इस वक्त तैयार 26 में से 17 ग्रीन बिल्डिंग्स विप्रो ने ही बनाई है। अभी हाल ही में इसने हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट के लिए ग्रीन बिल्डिंग बनाई है, जिसे गोल्ड सर्टिफिकेट मिला है।
कंपनी अब अस्पतालों और फार्मा सेक्टर के साथ-साथ इस सेक्टर पर भी पूरा जोर देने की योजना बना रही है। हाल मे विप्रो कार्बन कारोबार में भी उतरी है। कंपनी ने विप्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग के तहत इसकी शुरुआत की है।
यह कंपनियों को ऊर्जा को बचाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेगी। इसके लिए कंपनी ने ग्रीन आईटी सेवाओं के तहत सलाहकार सेवाओं, ग्रीन डाटा सेंटरों, कार्बन अकाउंटिंग, पेपरलेस ऑफिस और फ्रेट मैनेजमेंट सेवाओं की शुरुआत की है।
मंदी में आई पुराने कारोबार की याद
विप्रो कंज्यूमर केयर अब अपने रोशनी के कारोबार में फिर से जान फूंकने की कवायद में जुटी है