facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के 10 ठिकानों पर किए बड़े हमलेIT डिपार्टमेंट ने ‘स्वैपिंग प्रोविजन्स’ के लिए 20,000 ITRs को किया फ्लैग: जानें अब आपके पास क्या है रास्ताEPFO की EDLI स्कीम: कर्मचारियों को मिलता है ₹7 लाख तक का फ्री लाइफ इंश्योरेंस, ऐसे कर सकते हैं क्लेमअगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी जानकारीनिवेशक दें ध्यान! अगले हफ्ते कजारिया सेरामिक्स समेत ये 3 कंपनियां करेंगी शेयर बायबैक, जानें पूरी डिटेलDividend Stocks: अगले हफ्ते खुलेगा कमाई का पिटारा, टाटा-महिंद्रा-बजाज समेत 46 कंपनियां बांटेगी डिविडेंडAIF Market: पश्चिम एशिया संकट थमने से वैकल्पिक निवेश फंडों में लौटी रौनक, HNIs का बढ़ा भरोसाभारतीय फिनटेक कंपनियों की नजर अब ग्लोबल मार्केट पर, स्ट्राइप-पेपाल की तर्ज पर दुनिया भर में लाइसेंस लेने की होड़इनवेस्को सहित कई फंड कंपनियों ने नए निवेश पर लगाई रोक, पर निवेशक गोल्ड ETF खरीदें, बेचें या होल्ड करें?EMI नहीं चुका पाने के चलते बैंक वाले उठा ले गए बाइक? जानिए क्या हैं आपके पास कानूनी अधिकार

अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और रिटेलरों से संबंध बचाएंगे

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 8:01 AM IST

इस साल कपड़ा उद्योग ने 400 अरब डॉलर का ही निर्यात किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 16 फीसदी कम है।


ब्लैकस्टोन के स्वामित्व वाली देश की बड़ी निर्यात कंपनी गोकलदास एक्सपोट्र्स को दूसरी तिमाही में मुद्रा विनिमय दर में गिरावट के कारण मुनाफे में 75 फीसदी कमी आई। इस दौरान कंपनी की बिक्री बढ़ाई है। गोकलदास के प्रबंध निदेशक राजेन्द्र हिंदुजा से रघुवीर बदरीनाथ की निर्यात से जुड़ी मुश्किलों पर बातचीत के अंश:

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी का आपके कारोबार पर क्या असर पड़ा है?

हम अपना कारोबार संभालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि देश भर में कई ऐसे छोटे निर्यातक हैं जिनका कारोबार इस मंदी के कारण ठप हो चुका है। तमिलनाडु में मौजूद कपड़ा उद्योग के लिए तो अपना वजूद बचाए रखना भी मुश्किल हो रहा है।

हमारे जैसे बड़े खिलाड़ियों पर अगले साल की पहली तिमाही में इसका असर दिखाई देगा। खरीदारों की तरफ से आने वाले ऑर्डरों में देरी हो रही है। हाल ही में ‘थैंक्स गिविंग डे’ और क्रिसमस भी हमारे लिए कोई अच्छा कारोबार नहीं लेकर आए।

भविष्य में हमें निर्यात के ऑर्डरों में 25 फीसदी की गिरावट की आशंका है। अगर हम कंबोडिया, वियतनाम और बांग्लादेश से तुलना करे तो वहां श्रमिकों के वेतन पर होने वाला खर्च काफी कम है। इससे अगले साल हमारे लिए मुसीबत हो सकती है।

इस मंदी से निपटने के लिए गोकलदास क्या योजना बना रही है?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारों और रिटेलरों के साथ हमारे संबध हमें इस मुसीबत से बचा सकते हैं।

हमारा मुनाफा भी इस साल 6 फीसदी रहने का अनुमान है जो पिछले साल 7 फीसदी था। फिलहाल हमने हमारी सभी विस्तार योजनाएं टाल दी हैं।

लेकिन अभी हमने खतरे की घंटी नहीं बजाई है। हम देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं। देखना है कि साल 2009 की दूसरी छमाही हमारे लिए कैसी रहती है।

कपड़ा उद्योग की कई कंपनियां छंटनी कर रही हैं। क्या आप भी इस बारे में सोच रहे हैं?

कपड़ा उद्योग की छोटी कंपनियों में काम करने वाले लगभग 3 लाख लोग कंपनियां बंद होने के कारण नौकरियों से हाथ धो चुके हैं।

कपड़ा उद्योग से लगभग 50 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। गोकलदास एक्सपोट्र्स में ही लगभग 50,000 लोग कार्यरत हैं और हम कोशिश कर रहे हैं कि हम किसी को भी नौकरी से नहीं निकाले।

वह हमारे लिए आखिरी विकल्प होगा। हम मुनाफे पर समझौता कर सकते हैं लेकिन लोगों को नौकरी से नहीं निकालेंगे।

एक साल पहले ब्लैकस्टोन ने गोकलदास का अधिग्रहण किया था। क्या अब आपको दोनों के कारोबार में समानताएं नजर आ रही हैं?

ब्लैकस्टोन के पास दुनिया भर में कई कंपनियों का नेटवर्क है, जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं। हम कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से ब्लैकस्टोन के जरिए बातचीत कर रहे हैं।

लेकिन इस तरह के समझौते होने में समय लगता है। ब्लैकस्टोन के पोर्टफोलियो में अंतरराष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी समूह है, जो भविष्य में हमारे लिए एक अच्छा ग्राहक साबित हो सकता है।

Advertisement
First Published - December 8, 2008 | 11:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement