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‘उपलब्ध परिसंपत्तियों पर रहेगी नजर’

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Last Updated- December 12, 2022 | 8:16 AM IST

बीएस बातचीत
टाटा स्टील ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ वित्तीय प्रदर्शन किया और ऋण बोझ घटाने के अपने 1 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार कर लिया। टाटा स्टील के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने ईशिता आयान दत्त से बातचीत में कहा कि कंपनी ऋण बोझ घटाने पर लगातार ध्यान केंद्रित करेगी लेकिन मुनाफा और वृद्धि भी उतना ही महत्त्वपूर्ण होगी। पेश हैं मुख्य अंश:
जिंस चक्र को आप किस प्रकार देखते हैं ?
वैश्विक स्तर पर, जिंस कीमतों में अप्रैल 2021 में वैश्विक महामारी के कारण भारी गिरावट के बाद काफी तेजी से सुधार हुआ है। इसे अमेरिकी डॉलर में नरमी, नकदी प्रवाह के कारण जिंस की मांग, उद्योग में आपूर्ति की कमी, हालिया तिमाहियों के दौरान चीन से मांग बढऩे और वैश्विक महामारी के चरम के बाद मांग में व्यापक सुधार से बल मिला। यदि आप विभिन्न देशों में आर्थिक प्रोत्साहन पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि वह जीडीपी के एक उल्लेखनीय प्रतिशत में है। नकदी प्रवाह से प्रेरित मांग के कारण वैश्विक स्तर पर अधिकतर जिंस कीमतों में वृद्धि हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह चक्र कहीं अधिक मजबूत और लंबा रहेगा।

टाटा स्टील ने तीसरी तिमाही में अपनी सर्वाधिक समेकित एबिटा दर्ज की है। चौथी तिमाही में स्थिति कैसी रहेगी?
पिछली तिमाही के दौरान हमारा प्रदर्शन काफी दमदार रहा और हमने दूसरी तिमाही के सुधार कहीं बेहतर किया है। मांग के मोर्चे पर निकट भविष्य के लिए परिदृश्य काफी मजबूत बना हुआ है और हम लागत में कटौती पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके अलावा नए ग्रेड को लॉन्च करने के साथ उत्पाद मेल, कार्यशील के बेहतर पूंजी प्रबंधन और सोच-समझकर पूंजी आवंटन आदि तमाम मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। हमारे मार्जिन की रफ्तार और नकदी प्रवाह सृजन लगातार दमदार बना हुआ है। मुझे उम्मीद है कि यह चौथी तिमाही में भी जारी रहेगा। हम चौथी तिमाही में ऋण बोझ घटाना जारी रखेंगे और सकल ऋण को 12,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य से नीचे ले आएंगे।

अगले वित्त वर्ष में आप पूंजीगत व्यय पर ध्यान देंगे अथवा ऋण बोझ घटाने पर?
मुक्त नकदी प्रवाह और इष्टतम पूंजी ढांचा पर हमारा ध्यान रणनीतिक रूप से काफी महत्त्वपूर्ण है और वह भविष्य में भी जारी रहेगा। जैसा आप देख सकते हैं, यहां तक ??कि कोविड के प्रभाव वाले वर्ष में भी हमारे वित्तीय जोखिम प्रबंधन ने मुक्त नकदी प्रवाह पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया और हमने तेजी से उसका फायदा उठाने पर ध्यान दिया। मुनाफा और वृद्धि दोनों हमारे लिए बराबर महत्त्व के हैं। हमने अपने दम पर वृद्धि के लिए पूंजी आवंटन शुरू कर दिया है विशेष तौर पर कलिंगनगर में पेलेट संयंत्र और कोल्ड रोलिंग मिल को पूरा करने के लिए। इन दोनों से हमारे मार्जिन में वृद्धि होगी और इन्हें अगले 12 से 15 महीनों में पूरा कर लिया जाएगा।

वृद्धि के लिए आपकी क्या रणनीति होगी?
भारत में वृद्धि कंपनी के लिए एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक बुनियाद है और हम भारत में वृद्धि पर लगातार ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके तहत न केवल मात्रात्मक वृद्धि बल्कि बेहतर उत्पाद मेल, बेहतर ग्राहक सेवा आदि के जरिये मूल्य वृद्धि पर भी ध्यान दिया जाएगा। हम वृद्धि को अपने कारोबारी रणनीति के हिस्से के तौर पर कहीं अधिक समग्रता से देखते हैं। अपने कारोबार में विस्तार अथवा विलय अधिग्रहण में से जो भी विकल्प हमारे अनुकूल होता है हम उस पर आगे बढ़ते हैं। यदि कोई परिसंपत्ति अथवा कारोबार हमारे अनुकूल दिखता है तो हम उसमें जोखिम और अवसर की पहचान करते हैं और उसके बाद पूंजी आवंटन के संबंध में निर्णय लेते हैं। इसलिए हमारी नजर उस परिसंपत्ति पर रहेगी जो उपलब्ध हो सके और हमारे कारोबार के अनुकूल हो।

टाटा स्टील यूरोप ने इस्पात की कीमतों में तेजी के बावजूद निराश किया है। क्या भारतीय कारोबार ने उसे नकदी की मदद की है?
परिचालन के तौर पर हमारा यूरोपीय कारोबार पिछली कुछ तिमाहियों से स्थिर रहा है और अंतर्निहित प्रदर्शन में भी पहली तिमाही से तीसरी तिमाही के दौरान क्रमिक आधार पर लगातार सुधार हुआ है। वित्तीय नतीजा कार्बन संबंधी प्रावधानों एवं अन्य कारकों से प्रभावित हुआ। चौथी तिमाही में हमें बेहतर प्रदर्शन दिखना चाहिए। हमने इस साल अब तक सीधे तौर पर कोई वित्तीय सहायता नहीं दी है और स्थानीय प्रबंधन ने परिचालन जारी रखने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए हैं।

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First Published - February 15, 2021 | 11:47 PM IST

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