विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) वेंडर कंपनी की ओर से कारोबार के दौरान धोखाधड़ी करने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
डब्ल्यूएचओ के इस बयान से संकट में घिरी कंपनी को कुछ राहत तो जरूर मिली है, लेकिन अब भी कंपनी की समस्याएं पूरी तरह से सुलझी नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के इस संगठन ने अपने बयान में यह भी साफ कर दिया है कि वह भारतीय आईटी कंपनी के साथ किए जा चुके अपने सौदों की समीक्षा शुरू कर चुकी है।
डब्ल्यूएचओ के एक अधिकारी का कहना है कि 5 करोड़, 55 लाख अमेरिकी डॉलर वाली डब्ल्यूएचओ की वैश्विक प्रबंधन प्रणाली (जीएसएम) परियोजना में सत्यम प्रमुख वेंडर है। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने भारतीय कंपनी के साथ और 4 लाख अमेरिकी डॉलर वाली कुल तीन परियोजनाओं के लिए करार किया हुआ है।
अधिकारी का कहना है, ‘जीएसएम के अलावा सत्यम ने एक और भविष्य सौदे के लिए बोली लगाई हुई है।’ डब्ल्यूएचओ की प्रवक्ता को पूछे जाने पर कि सत्यम में धोखाधड़ी के मामले का खुलासा होने के बाद संगठन के आईटी कंपनी के साथ कारोबार पर क्या फर्क पड़ेगा ।
उनका कहना है, ‘डब्ल्यूएचओ संगठन के साथ सत्यम के मौजूदा ठेकों से जुड़े करारों की समीक्षा कर रही है और अगर सत्यम आगे प्रदर्शन करने की स्थिति में नहीं रही तो ऐसी स्थिति में जीएसएम परियोजना कार्य को पूरा करने के लिए आकस्मिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रही है।’
पहले ही विश्व बैंक सत्यम के साथ कारोबार पर रोक लगा चुका है, जबकि संयुक्त राष्ट्र सचिवालय ने पहले ही अपनी वेंडर की फेहरिस्त से सत्यम को बाहर कर दिया है।
डब्ल्यूएचओ की बाह्य ऑडिटर कंपनी कंप्ट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (सीएजी) ने पहले ही परियोजना को लागू करने की कंपनी की प्रक्रिया की आलोचना की है। सीएजी ने जीएसएम परियोजना के कार्यान्वयन के साथ जोड़े कई जोखिमों की ओर भी इशारा किया है।
जीएसएम परियोजना पहले ही तय समयसीमा की बढ़ाई गई अवधि पर भी पूरी नहीं हो पाई है।