बीएस बातचीत
साल 2020 में पेटेंट आवेदन के लिहाज से आईबीएम इंडिया का अनुसंधान एवं विकास केंद्र दूसरे पायदान पर रहा है। भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं ने 930 पेटेंट के लिए आवेदन किए। सबसे अहम बात यह है कि हाल में लॉन्च किए गए आईबीएम क्लाउड सैटेलाइट में भारत से महत्त्वपूर्ण योगदान रहा जिसे हाइब्रिड क्लाउड, डेटा और एआई पर ध्यान केंद्रित करने के लिहाज से काफी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। आईबीएम के एमडी (भारत एवं दक्षिण एशिया) संदीप पटेल ने शिवानी शिंदे से विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:
वैश्विक स्तर पर आईबीएम के पुनर्गठन से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
आईबीएम इंडिया आईबीएम ग्लोबल की एक छोटी दुनिया है। हमने दुनिया भर में जो निवेश- ब्रांड, वैश्विक मिशन, सॉफ्टवेयर लैब, हार्डवेयर लैब, अनुसंधान लैब आदि- किया है वह भारत में भी है। हम इस विचार के प्रस्तावक रहे हैं कि भारत में हम मेक इन इंडिया फॉर इंडिया ऐंड फॉर द वल्र्ड (भारत और दुनिया के लिए भारत में विनिर्माण) एजेंडे के साथ हैं। यही हमारा एजेंडा रहा है और यह आगे भी जारी रहेगा।
भारत में हमारा कारोबार है लेकिन यहां हमारे कई वैश्विक मिशन भी हैं। इसलिए कंपनी जिस वैश्विक पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है उसकी झलक भारत में भी दिखेगी। वैश्विक स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी होने पर आईबीएम 59 अरब डॉलर की कंपनी होगी और नई कंपनी (न्यूको) 19 अरब डॉलर के राजस्व के साथ पूरी तरह प्रबंधित बुनियादी ढांचा सेवा पर केंद्रित कंपनी होगी।
वास्तव में भारत में मौजूद कर्मचारियों के लिए इसे लेकर काफी उत्साह है। न्यूको पर्याप्त पूंजी और कारोबार के साथ एक अलग कंपनी होगी।
सौ वर्ष से अधिक पुरानी कंपनी के लिए यह बदलाव कितना महत्त्वपूर्ण है?
इस बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए हमारी रणनीति दुनिया की अग्रणी हाइब्रिड क्लाउड एवं एआई कंपनी बनाना है। हम लगातार इस संबंध में बात कर रहे हैं कि हाइब्रिड क्लाउड में जबरदस्त अवसर मौजूद है।
हमें हाइब्रिड क्लाउड में 1 लाख करोड़ डॉलर का अवसर दिख रहा है जिसमें 25 फीसदी से कम वर्कलोड है जो अब तक क्लाउड में चले गए हैं। शेष को स्थानांतरित करने के लिए हमारा नजरिया प्लेटफॉर्म केंद्रित है। यहीं पर हमारा रेड हैट का अधिग्रहण काम करेगा।
हम रेड हैट को एक अनोखा प्लेटफॉर्म बनाएंगे ताकि हमारे वैश्विक, जटिल एवं अत्यधिक विनियमित ग्राहकों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। यह एक ऐसा हाइब्रिड क्लाउड प्लेटफॉर्म होगा जो खुला, लचीला और सुरक्षित होगा। हम औद्योगिक क्लाउड पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसे आईबीएम क्लाउड फॉर फाइनैंशियल सर्विसेज और आईबीएम क्लाउड फॉर टेलीकम्युनिकेशंस के साथ गंभीर मिशन एवं उच्च विनियमित उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है। हमारे औद्योगिक की प्रमुख बुनियाद रेड हैट ओपनशिफ्ट है।
आईबीएम की क्लाउड केंद्रित रणनीति के लिए भारत कितना महत्त्वपूर्ण है?
आईबीएम के इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस वैल्यू के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में ग्राहक फिलहाल अपने आईटी बजट का 17 फीसदी हिस्सा क्लाउड के लिए आवंटित करते हैं। साथ ही अपने क्लाउड बजट में वे हाइब्रिड पर खर्च को बढ़ा रहे हैं जो मौजूदा 42 फीसदी से बढ़कर 2023 में 49 फीसदी हो जाएगा।
आईबीएम के लिए भारत एक विशाल आईटी सेवा बाजार है। यहां हमारे करीबी प्रतिस्पर्धी के मुकाबले हमारी बाजार हिस्सेदारी करीब दोगुनी है। भारत में हमने करीब 1,000 ग्राहकों के डिजिटल बदलाव के सफर को आकार दिया है।
एंटरप्राइज श्रेणी में हमारे काम के अलावा आईबीएम वर्षों से केंद्र एवं राज्य सरकार की डिजिटलीकरण परियोजनाओं से भी जुड़ी रही है। इनमें हाइब्रिड क्लाउड, आईओटी, डेटा एवं एआई और सुरक्षा जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता रहा है। हमने अपने प्रकार के पहले वर्चुअल विश्वविद्यालय समशिक्षा पर शिक्षा मंत्रालय और नीति आयोग के साथ साझेदारी की है।
कंपनी के क्लाउड कारोबार में भारतीय आईबीएम टीम किस प्रकार योगदान कर रही है?
वैश्विक स्तर पर आईबीएम 2020 में अमेरिका में 9,130 पेटेंट के साथ अग्रणी रही और आईबीएम के पेटेंट लीडरशिप में भारत का दूसरा सबसे बड़ा योगदान रहा।
भारत के शोधकर्ताओं को 930 पेटेंट हासिल हुए। भारतीय प्रयोगशाला हमारी रणनीति के बिल्कुल अनुरूप हैं और इन प्रयोगशालाओं ने आईबीएम के उत्पाद, समाधान एवं सेवाओं के एकीकरण में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उदाहरण के लिए, हाल में हमने आईबीएम क्लाउड सैटेलाइट को लॉन्च करने की घोषणा की थी। इसमें इंडिया सॉफ्टवेयर लैब्स का उल्लेखनीय योगदान रहा।