facebookmetapixel
Advertisement
डिजिटल पेमेंट नियमों में बदलाव,UPI पर MDR से 10,000 करोड़ रुपये तक सरकार को मिल सकता है बड़ा राजस्वNDA सांसदों की बैठक में खेल और रोजगार पर फोकस, युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों का दिया गया ब्यौरा1991 के आर्थिक सुधारों ने बदली भारत की दशा, उसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार: जयराम रमेशखनिज ब्लॉकों की नीलामी के बाद भी धीमी रफ्तार, 720 में केवल 105 खदानें शुरूREIT और InvIT निवेशकों को बड़ी राहत, नई टैक्स व्यवस्था में भी डिविडेंड रहेगा पूरी तरह टैक्स फ्रीडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI को 4 हफ्ते में SOP बनाने का दिया निर्देशFuel Prices: पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सरकार रखेगी नजर, जरूरत पड़ने पर उठाएगी कदमTax Amendment Bill 2026: विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगे टैक्स नियम, लोकसभा में विधेयक पेशNSE क्लोजिंग प्राइस विवाद से बदला म्युचुअल फंड NAV, निवेशकों पर दिखा अलग-अलग असरMeta के अधिकारियों से आज सरकार की बैठक, WhatsApp और कंटेंट मॉडरेशन पर होंगे सवाल

हम दीर्घावधि बॉन्डों को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं

Advertisement
Last Updated- December 14, 2022 | 8:58 PM IST

बीएस बातचीत
डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख सौरभ भाटिया ने पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि ऊंचे राजकोषीय आंकड़े प्रतिफल की राह में बदलाव और इसे नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए उपायों के असर को दर्शा रहे हैं। पेश है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
ताजा घटनाक्रम को देखते हुए, बॉन्ड बाजारों द्वारा अगली कुछ तिमाहियों में कैसा प्रदर्शन किए जाने की संभावना है?
पिछले कुछ महीनों के दौरान बॉन्ड बाजारों ने अपेक्षाकृत सीमित दायरे में कारोबार किया है। अतिरिक्त नकदी के साथ साथ हेल्ड टु मैच्युरिटी (एचटीएम)-आधारित टारगेटेड लॉन्ग-टर्म रीपो ऑपरेशंस (टीएलटीआरओ) ने भी क्रेडिट स्प्रेड को सीमित बनाए रखा है। चूंकि प्रतिफल रेखा काफी गहरी है, हम लगातार यह उम्मीद कर रहे हैं कि अल्पावधि में प्रतिफल रीपो दरों में बदलाव की संभावना के बजाय मांग-आपूर्ति पर केंद्रित होगा। आरबीआई का बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम भी प्रतिफल को सपाट बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है और हमें दर कटौती चक्र के अंत के करीब ला सकता है। कम प्रतिफल और पूंजीगत लाभ की कम संभावना वाला शॉर्टर-ऐंड सेगमेंट मध्यावधि से दीर्घावधि बॉन्डों के लिए राह बना सकता है।

क्या आप वित्त वर्ष 2021 के अंत तक बड़े राजकोषीय घाटे की आशंका देख रहे हैं?
हम राजकोषीय घाटे में बड़ी तेजी की अवधि से गुजर रहे हैं। ऊंचे राजकोषीय आंकड़ों का असर प्रतिफल पर पहले ही दिख चुका है और इसे नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थन मुहैया कराया गया है।

पिछले कुछ महीनों से आपकी निवेश रणनीति क्या रही है?
हम लगातार मध्यावधि से दीर्घावधि बॉन्डों को पसंद कर रहे हैं। संक्षिप्त अवधि के सेगमेंट में, कैलेंडर वर्ष 2022 की पहली छमाही में परिपक्व हो रहे बॉन्ड पसंदीदा हैं।
क्या बॉन्ड बाजारों का मौजूदा समय में वैश्विक केंद्रीय
बैंकों द्वारा निरंतर तरलता से संबंध है?
केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए गए नीतिगत उपायों (पारंपरिक और गैर-पारंपरिक उपाय समेत) की मात्रा को देखते हुए, हमें निकदी की निकासी के परिवेश से पहले वृद्घि में सुधार की उम्मीद है। हम एक तरफ जहां अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार देख रहे हैं, वहीं कुछ देश लॉकडाउन फिर से शुरू कर रहे हैं। अभी भी अज्ञात जोखिम बने हुए हैं और जब तक ऐसी स्थिति रहेगी, इस दौर से मुकाबले के लिए एक तरीका है अल्पावधि में निवेश विभाजित करना। इससे न सिर्फ प्रतिफल की रेखा को सपाट बनाए रखने का फायदा मिलेगा बल्कि बड़े उतार-चढ़ाव से संपूर्ण निवेश को सुरक्षित बनाने में भी मदद मिलेगी।

Advertisement
First Published - November 23, 2020 | 12:27 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement