बीएस बातचीत
फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड की 6 संकटग्रस्त योजनाओं के 300,000 से ज्यादा निवेशक इस पर वोट देंगे कि क्या इस फंड हाउस को इन योजनाओं को बंद करने की अनुमति दी जानी चाहिए। फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया के अध्यक्ष संजय सप्रे ने समी मोडक के साथ बातचीत में बताया कि वोट नहीं किए जाने से जबरन बिकवाली को बढ़ावा मिलेगा। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
आप निवेशकों से योजनाओं को बंद किए जाने के पक्ष में वोट देने को क्यों कह रहे है?
हमारा मानना है कि वोट मिलने से चरणबद्घ तरीके से 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों की बिक्री में मदद मिलेगी। बेहद संक्षिप्त अवधि में प्रतिभूतियों को बेचने के लिए बाध्य करने के बजाय इससे निवेशकों के लिए इसके बेहतर परिणाम निकलेंगे।
कुछ निवेशकों द्वारा खिलाफ में वोटिंग की क्या वजह है?
हमने निवेशकों से उनके निवेश की वैल्यू पर उनके वोट के प्रभाव को ध्यान में रखकर वोटिंग का अनुरोध किया है। फिक्स्ड इनकम बाजार धीरे धीरे सामान्य हालात में लौट रहे हैं। हम अपने पोर्टफोलियो में कई प्रतिभूतियों के लिए दिलचस्पी में इजाफा देख रहे हैं, जो शुरू में गैर-तरलीकृत थीं। हमें हाल में कई बड़े पूर्व-भुगतान भी मिले हैं। वोट नहीं मिलने से बिकवाली का दबाव बढ़ेगा जिससे योजनाओं के आपात परिसमापन की स्थिति पैदा होगी। इस तरह की स्थिति में, इनमें से कई प्रतिभूतियों को वैल्यू के संदर्भ में बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
सभी निवेशकों को भुगतान में कितना समय लगेगा?
यह भुगतान परिसंपत्तियों, कूपन की बिक्री से समय समय पर नकदी के आधार पर किया जाएगा। औपचारिक वोटिंग के परिणाम के बाद यह पुन: भुगतान जल्द शुरू किया जा सकेगा। दूसरी तरफ, नकारात्मक सहमति वाली वोटिंग की स्थिति में योजनाओं को बिक्री के लिए पुन: खोला जाएगा और बिक्री की जाएगी।
इन योजनाओं को बंद करने से पहले फंड हाउस पर अनुचित कार्य प्रणालियों के भी आरोप हैं। इन आरोपों के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
हम इन गलत आरोपों का पूरी तरह खंडन करते हैं। हमने हमेशा प्रशासनिक प्रणाली के उच्च मानकों पर अमल किया है। हमने अपने निवेश निर्णयों और योजनाओं को बंद करने में उचित प्रक्रिया पर अमल किया। हमने हमेशा अपने निवेशकों के हित में और लागू नियमों के अनुसार काम किया है। हमारा ध्यान जल्द से जल्द यूनिटधारकों को रकम वितरित करने पर बना हुआ है।
ये 6 फंड 24 अप्रैल 2020 से 11,907 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटा चुके हैं। इसमें करीब आधी रकम ‘ए’ रेटिंग वाली प्रतिभूतियों से प्राप्त हुई। इनमें से कई प्रतिभूतियां गैर-सूचीबद्घ थीं, और कई मामलों में, हमारी योजनाओं से बहुलांश निवेशक जुड़े थे। इन सब से संकेत मिलता है कि ये प्रतिभूतियां वैल्यू बरकरार रखेंगी। 6 में से 4 योजनाएं नकदी संपन्न हैं और यूनिटधारकों को लौटाने के लिए 7,488 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी उपलब्ध है। यह सब नकदी किसी सेकेंडरी बाजार की बिक्री के बगैर प्राप्त हुई है।
इस घटनाक्रम से फंड हाउस किस तरह से प्रभावित हुआ? क्या बिकवाली की वजह से अन्य योजनाओं का प्रदर्शन भी प्रभावित हुआ है?
जब हमने इन योजनाओं को बंद करने का निर्णय लिया तो हमने यह महसूस किया कि यह हमारी साख प्रभावित करेगा, जो हमने पिछले 25 वर्षों में बनाई। हम यह निर्णय सिर्फ इसलिए लेना चाहते थे कि हमारी कंपनी का मानना था कि हमारे निवेशकों के लिए वैल्यू सुरक्षित बनाने के लिए यह सही निर्णय है। हम यह जानते हैं कि यूनिटधारकों को जल्द से जल्द पैसा लौटाना निवेशकों का भरोसा फिर से पाने का पहला और एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।