वोडाफोन आइडिया ने अपने 8,837 करोड़ रुपये के एजीआर बकाये के भुगतान के लिए चार साल की मोहलत का विकल्प चुना है। पिछले साल वह एक साल की मोहलत पहले ही ले चुकी थी। इसी प्रकार दूरसंचार कंपनी के पास टाले गए बकाये पर ब्याज की रकम को सरकार की अतिरिक्त हिस्सेदारी में बदलने का विकल्प है।
सरकार ब्याज के 16,000 करोड़ रुपये के शुद्ध वर्तमान मूल्य के साथ ब्याज को इक्विटी में बदलने अपने पिछले निर्णय के तहत वोडाफोन आइडिया में 33 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए तैयार है। दूरसंचार क्षेत्र के एक विश्लेषक ने कहा कि यदि कंपनी फिर से ब्याज को इक्विटी में बदलने का विकल्प चुनती है तो सरकार को 6से 7 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी मिल सकती है। वोडाफोन आइडिया ने भविष्य की पहल के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की।
बुधवार को देर शाम स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में वोडाफोन आइडिया ने कहा है कि उसे 15 जून को सरकार से एक पत्र मिला जिसमें वित्त वर्ष 2018-19 तक सभी एजीआर बकाया के लिए चार साल की मोहलत की पेशकश की गई थी।
वोडाफोन आइडिया ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि कंपनी के बोर्ड ने 8,837 करोड़ रुपये के एजीआर बकाये को टालने का फैसला किया है। विभिन्न निपटान के कारण यह रकम बदल सकती है और मार्च 2026 में मोहलत की समाप्ति के बाद अंतिम रकम का भुगतान 6 बराबर किस्तों में किया जाना है।
वोडाफोन आइडिया को एजीआर बकाये पर ब्याज को इक्विटी में बदलने के बारे में 90 दिनों भीतर निर्णय लेना है।