चंडीगढ़ में वाहन कलपुर्जा निर्माता इकाइयां मौजूदा मंदी को मात देने में सफल रही हैं। इस क्षेत्र में लगभग 200 लघु एवं मझोली इकाइयां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।
इस्पात की कीमतों में गिरावट के अलावा इनकी मूल इकाइयां, खासकर ट्रेक्टर निर्माण फर्मे मंदी में भी अपने कारोबार को बचाने में सफल रही हैं। एचएमटी एंसीलियरीज एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश अरोड़ा ने कहा कि संगठन की 44 सदस्य कंपनियां 6 महीने पहले उस वक्त मुश्किल हालात से जूझ रहे थे जब इस्पात की कीमतें 40 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थीं।
अब जब इस्पात की कीमत घट कर 26 रुपये प्रति किलो पर आ गई है तो ज्यादातर इकाइयों के लिए कारोबार में बने रहना आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि मंदी की वजह से इन इकाइयों की मांग में गिरावट नहीं आई है।
कंसल इंजीनियरिंग, चंडीगढ़ के व्यवस्थापक नरेश कंसल ने कहा कि मांग में गिरावट नहीं आई है। अगर गिरावट आई भी है तो यह बेहद मामूली गिरावट है और उन्हें उम्मीद है कि साल के लिए उत्पादन लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
कंसल ने यह भी बताया कि इस्पात की कीमतों में गिरावट हमारे लिए सकारात्मक रही है। इस क्षेत्र की वाहन कलपुर्जा इकाइयों में कोस्ट-कटिंग यानी खर्च घटाने के उपायों के तहत कोई छंटनी नहीं की गई है।
कंसल ने कहा, ‘हालांकि वाणिज्यिक वाहनों के सेगमेंट में मांग धीमी हुई है, लेकिन यात्री वाहनों का सेगमेंट ठीक-ठाक काम कर रहा है।’ क्षेत्र में कई इकाइयां एचएमटी ट्रेक्टर्स, पंजाब ट्रेक्टर्स और सोनालिका ट्रेक्टर्स जैसे ट्रेक्टर निर्माताओं से ठेके हासिल करने में सफल रही हैं। इसके अलावा इन इकाइयों को स्वराज माजदा, महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा और मारुति से भी ठेके मिले हैं।
इन मूल इकाइयों में से ज्यादातर इकाइयों का कामकाज वाहन कलपुर्जा इकाइयों के लिए उत्साहजनक है। पंजाब ट्रेक्टर्स लिमिटेड इस साल के लिए 32,000 टे्रक्टरों के अपने सालाना लक्ष्य को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम रही है। अगले साल के लिए इसका लक्ष्य 40,000 ट्रेक्टर का है जो कलपुर्जा निर्माता इकाइयों के लिए एक सुखद खबर है।
एचएमटी ट्रेक्टर्स का प्रदर्शन लगभग 5,000 ट्रेक्टरों के सालाना उत्पादन के साथ थोड़ा फीका रहा है। हालांकि बैंक ऋण हासिल करने के मोर्चे पर इन वाहन कलपुर्जा इकाइयों को संघर्ष करना पड़ रहा है। जोखिम से बचने के लिए बैंक इन इकाइयों को कर्ज देने में हिचकिचा रहे हैं।