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JAL समाधान योजना पर छिड़ी कानूनी जंग: वेदांत ने NCLAT में अदाणी की बोली को दी चुनौती

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वेदांत ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी समूह की बोली को एनसीएलएटी में चुनौती दी है। कंपनी का दावा है कि उनकी बोली अधिक मूल्यवान और पारदर्शी थी

Last Updated- April 10, 2026 | 9:59 PM IST
Vedanta
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी वेदांत ने शुक्रवार को एनसीएलएटी में जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए समाधान योजना की मंजूरी को चुनौती दी। कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) के सामने दावा किया कि अदाणी समूह की बोली कंपनी के परिसमापन मूल्य यानी कंपनी को बेचने या बंद करने की स्थिति में मिलने वाली राशि से कम थी। ऐसे में यह बोली हिस्सेदारों की वसूली पर असर डालेगी।

एनसीएलएटी के दिल्ली पीठ के सामने 10 अप्रैल को वेदांत ने तर्क पेश किया कि कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने अदाणी की योजना को मंजूरी दी, जो 14,535 करोड़ रुपये की थी जबकि जेएएल का परिसमापन मूल्य लगभग 15,799.53 करोड़ रुपये के आसपास आंका गया था। वेदांत ने दावा किया कि इसके विपरीत उसकी 17,926 करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजना परिसमापन सीमा से अधिक थी और इससे ऋणदाताओं को अधिकतम मूल्य मिलता।

यह मामला समाधान प्रक्रिया के खिलाफ वेदांत की चुनौती का हिस्सा है। अब 13 अप्रैल को आगे की सुनवाई होगी। वेदांत ने दोहराया कि उसकी बोली न केवल कुल मूल्य के संदर्भ में बल्कि तुलनात्मक आधार पर भी बेहतर थी।

कंपनी ने यह भी कहा कि उसने अदाणी की योजना से लगभग 3,400 करोड़ रुपये अधिक सकल मूल्य और 500 करोड़ रुपये अधिक के शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) की पेशकश की थी। कंपनी ने तर्क दिया कि सीओसी ने कम मूल्य वाली बोली के निर्णय के बारे में कोई सार्थक चर्चा का बिंदु नहीं बताया।

वेदांत के वकील ने एनसीएलएटी से कहा कि वित्तीय ऋणदाता सीओसी के सदस्य होते हैं। वे एक विश्वासपात्र की भूमिका में होते हैं। इनमें कर्जदाता, कर्मचारी, घर खरीदने वाले और वैधानिक प्राधिकरण जैसे हिस्सेदार शामिल हैं। वकील ने कहा कि एक ऐसी योजना को मंजूरी देना जो कुल वसूली के मुकाबले तत्काल भुगतान को प्राथमिकता देती है, वह वास्तव में दिवाला ढांचे के उद्देश्यों के खिलाफ है। कंपनी ने बोली प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।

वेदांत के अनुसार सीओसी ने शुरुआत में एक चुनौती प्रणाली की पेशकश तब की थी जब उसने बोली को उपयुक्त नहीं पाया था। लेकिन अंत में वही योजना मंजूर कर दी जिसे पहले अपर्याप्त माना गया था। कंपनी ने यह भी दावा किया कि वह उस चुनौती प्रक्रिया में एकमात्र सक्रिय हिस्सेदार थी जो पांच दौर तक चली और इस दौरान उसने अपनी बोली को दो बार 250 करोड़ रुपये बढ़ाया और इसे और बढ़ाने के लिए तैयार थी।

वेदांत ने प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। कंपनी ने चैलेंज सिस्टम के डिजाइन की आलोचना करते हुए कहा कि बोलीदाताओं को शुरुआती और बाद के भुगतान की जानकारी देने की जरूरत थी लेकिन उन्हें प्रत्येक दौर के बाद केवल सबसे उच्चतम एनपीवी की जानकारी दी जाती थी। वेदांत का कहना था कि इससे बोलीदाताओं को अपने प्रस्तावों में दोबारा बदलाव करने का उचित अवसर नहीं मिला, विशेषकर शुरुआती भुगतान बढ़ाने में।

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First Published - April 10, 2026 | 9:59 PM IST

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