अमेरिका स्थित फंड कंपनी इंटरप्स अब भारतीय एयरलाइन एयर इंडिया के अधिग्रहण की दौड़ से बाहर निकल गई है। भारत में कई दबावग्रस्त परिसंपत्तियों पर ध्यान केंद्रित कर चुकी यह अमेरिकी कंपनी बोली लगाने के लिए एयरलाइन के कर्मचारियों के साथ भागीदारी की संभावना तलाश रही थी। लेकिन एयर इंडिया कर्मचारी संगठन ने उससे हाथ मिलाने से इनकार कर दिया, जिसके साथ ही इंटरप्स अब इस दौड़ से बाहर हो गई है। इंटरप्स इंक के चेयरमैन लक्ष्मी प्रसाद ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ इसकी पुष्टि की है कि फंड ने अपनी पेशकश वापस ले ली है, लेकिन इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है।
सरकार को कर्ज में डूबी राष्ट्रीय एयरलाइन के अधिग्रहण के लिए कई आवेदन मिले हैं। टाटा संस इस दौड़ में सबसे आगे है। वाणिज्यिक निदेशक मीनाक्षी मलिक के नेतृत्व में 219 एयर इंडिया कर्मचारियों के संगठन ने भी अपनी पेशकश सौंपी है। कर्मचारियों ने एक वित्तीय निवेशक के साथ भागीदारी की है। चुने गए बोलीदाताओं की घोषणा 5 जनवरी को की जाएगी। इंटरप्स ने 49:51 प्रतिशत शेयरधारिता के साथ कर्मचारियों के साथ भागीदारी की योजना बनाई थी और भारत के विमानन क्षेत्र में अरबों डॉलर के निवेश का वादा किया था। फंड का बाजार पूंजीकरण 2.8 करोड़ डॉलर का है और वह शुरू में लवासा कॉर्प, एशियन कलर कोटेड स्टील और रिलायंस नवल जैसी दिवालिया कंपनियों के लिए विफल कोशिश कर चुका है।
एयर इंडिया को 3600 करोड़ रु. का नुकसान
एयरलाइन के चेयरमैन राजीव बंसल ने आज कहा कि विनिवेश की राह देख रही एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में 3,600 करोड़ रुपये का नकद नुकसान हुआ। बंसल ने कहा कि एयरलाइन के स्टैंडअलॉन और समेकित खातों को एकीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल एयरलाइन को 3,600 करोड़ रुपये का नकद नुकसान हुआ और यह 2018-19 के मुकाबले काफी कम था। भारत से अंतरराष्ट्रीय यातायात में बड़ी भागीदारी वाली एयर इंडिया ने कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से फंसे भारतीयों को लाने में अहम योगदान दिया था और इसके परिणामस्वरूप इस साल उसकी आय में सुधार देखने को मिला। बंसल ने कहा, ‘हमारी वित्तीय स्थिति में हरेक तिमाही में सुधार आया है। दूसरी तिमाही पहली के मुकाबले काफी बेहतर रही थी। तीसरी तिमाही भी अच्छी रही है। यह एक अच्छा हवाई यातायात सीजन है। बड़ी तादाद में अंतरराष्ट्रीय यातायात खासकर अमेरिका से जुड़े विभिन्न स्थानों के लिए है। अमेरिका और कनाडा लगातार हमारे प्रमुख बाजार रहेंगे।’