सत्यम प्रकरण को देश में अब तक के सबसे बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में सामने आए 25 से अधिक दिन हो गए। इसके बावजूद, आंध्र प्रदेश और केंद्रीय जांच संगठन अब तक इस मामले में कोई ठोस सुबूत जुटा पाने में नाकाम रही हैं।
ये एजेंसियां अभी तक इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ सकी हैं कि पैसे कहां और किस तरह गायब हुए। एनरॉन मामले का उदाहरण देते हुए विश्लेषक बताते हैं कि इस मामले को भी जल्दबाजी में पूरी तरह उजागर कर पाना संभव नहीं होगा।
मालूम हो कि तीन साल चली लंबी जांच के बाद ही केनेथ ले को दोषी ठहराया जा सका था। इस बीच संकेत हैं कि केंद्रीय और राज्य की एजेंसियों के बीच मतभेद पनप रहे हैं।
आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा के आम चुनाव अब बहुत करीब हैं। संभवत: मार्च की शुरुआत तक चुनावों की तिथि घोषित कर दी जाए।
ऐसा हो जाने पर आचार संहिता के चलते दोनों सरकारों के लिए कोई भी नई नीति तय करना मुमकिन नहीं रह जाएगा। आंध्र प्रदेश सरकार पर तो अभी से आरोप लग रहे हैं कि वह सत्यम प्रकरण की जांच को लेकर गंभीर नहीं है।
टीकाकारों के मुताबिक, आगामी चुनावों में भ्रष्टाचार मुद्दा बन सकता है और तब सरकार को सत्ता विरोधी लहर के चलते सत्ता गंवानी पड़ सकती है।
यदि ऐसा हुआ तो फिर जांच की गति और धीमी हो जाएगी। कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता भी दोनों स्तरों की एजेंसियों के बीच समन्वय के मुद्दे पर हाथ खड़ा कर चुके हैं। उन्होंने मामले को राज्य के अधिकार क्षेत्र में बताया।
जांच की राह में और भी बड़े रोड़े हैं। इनमें अब तक कंपनी के सीईओ और सीएफओ की नियुक्ति न हो पाना, मायटास की भूमिका तय न हो पाना, कर्मचारियों की वास्तविक संख्या का निर्धारण न हो पाना, ग्राहकों की बडी तादाद, देश में दायर तीन जनहित याचिकाएं, अपऐड मामले की देनदारियां और राजू भाइयों से पूछताछ संबंधी अनुरोध कोर्ट द्वारा टाल दिए जाना शामिल हैं।
मामला इतना पेचीदा है कि राजू की खुलेआम स्वकीरोक्ति के बावजूद अब तक सेबी और गंभीर धोखाधड़ी जांच आयोग राजू से पूछताछ करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने इन एजेंसियों की पूछताछ अनुमति याचिकाएं तकनीकी आधार पर खारिज कर दी।
इस संबंध में हाइकोर्ट में दायर सेबी की याचिका 9 फरवरी तक टाल दी गई है, जबकि एसएफआईओ से कहा गया है कि वह सेबी की याचिका पर सुनवाई हो जाने के बाद ही
कोर्ट में आए। समस्या समन्वय की भी है। इस घोटाले की जांच में करीब 7 एजेंसियां शामिल हैं। केंद्र सरकार की एजेंसी के अलावा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, सेबी, एसएफआईओ, आंध्र प्रदेश सीआईडी, आयकर विभाग और इंस्टीटयूट ऑफ चार्टड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया मामले की जांच कर रही है।
अब सवाल उठता है कि क्या इतने सारी एजेंसियों के काम करने से जांच में आसानी होगी या मामला और उलझेगा। हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री वाईएसआर ने केंद्रीय वित्त और कंपनी मामलों के मंत्रालय से मामले की जांच में समन्वय बनाने के लिए किसी एजेंसी को दायित्व सौंपने का आग्रह किया।