केंद्र सरकार प्रस्तावित सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों (व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण विनियमन और विज्ञापन निषेध) संशोधन अधिनियम, 2020 के जरिये सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए न्यूनतम आयु सीमा को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करना चाहती है। साथ ही इसके जरिये किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों की बिक्री को प्रतिबंधित करने की कोशिश की गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार मसौदा विधेयक में खुली सिगरेट की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में धूम्रपान करने पर जुर्माने की रकम को 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये किए जाने और निजी उपभोग के लिए ऐसे उत्पादों के विज्ञापन (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। यदि इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा तो सिगरेट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी आईटीसी के अलावा गॉडफ्रे फिलिप्स एवं वीएसटी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों की परेशानी बढ़ सकती है।
एडलवाइस के अनुसंधान विश्लेषक अबनीश रॉय ने कहा, ‘यदि इस मसौदा विधेयक को लागू किया जाता है तो आगे सिगरेट उद्योग की परेशानी कहीं अधिक बढ़ जाएगी। यदि इस प्रस्तावित कानून को अधिनियमित किया गया तो खुदरा ग्राहकों को जुटाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में मात्रात्मक बिक्री प्रभावित होगी क्योंकि प्रस्तावित कानून के तहत केवल सीलबंद पैकेट में ही सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी गई है।’
बिक्री में संकुचन के अलावा आगामी बजट में जीएसटी दरों में वृद्धि की आशंका भी इन शेयरों के लिए चिंता की बात है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज ने एक हालिया नोट में कहा है, ‘सरकार की कमजोर वित्तीय हालात और मौजूदा कोविड परिदृश्य के मद्देनजर हमारा मानना है कि बजट अथवा जीएसटी परिषद की किसी भी बैठक के दौरान जीएसटी दरों में वृद्धि की जा सकती है।’
हालांकि पिछले 10 वर्षों के दौरान आईटीसी ने अपने कारोबार को विविधा बनाया है लेकिन सिगरेट श्रेणी से अभी भी उसे सबसे अधिक राजस्व अर्जित होता है। वित्त वर्ष 2020 में कंपनी के कुल एबिटा में सिगरेट कारोबार का योगदान करीब 85 फीसदी दर्ज किया गया। यहां तक कि जुलाई 2017 (जीएसटी में वृद्धि) से फरवरी 2020 (एनसीसीडी शुल्क वृद्धि) के दौरान 31 महीनों की अवधि में सिगरेट पर जीएसटी में कोई वृद्धि नहीं की गई लेकिन आईटीसी की सिगरेट बिक्री एवं एबिटा प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
इन प्रस्तावों के बावजूद तीनों शेयरों में दिसंबर के अंत में मामूली बढ़त दर्ज की गई।
हालांकि नियमों को लागू करने में सुस्ती से नुकसान की कुछ भरपाई हो सकती है लेकिन अवैध सिगरेट एवं तंबाकू उत्पादों के उत्पादन एवं बिक्री पर रोक लगाए जाने से बड़ी सिगरेट कंपनियों को फायदा हो सकता है। रॉय ने कहा, ‘सिगरेट की खुदरा बिक्री अभी भी उन राज्यों में व्यापक रूप से प्रचलित है जहां इस तरह का कानून पहले से ही प्रभावी है। इसलिए हमारा मानना है कि इस नए कानून की निगरानी करना और इसे लागू करना मुश्किल होगा।’