साल 2012 तक दुनिया में 123 अरब डॉलर सालाना का कारोबार कर रही दवाएं पेटेंटमुक्त हो जाएंगी। इसे भारतीय दवा उद्योग के लिए संभावनाओं का द्वारा खुलना माना जा रहा है।
अनुमान है कि जेनेरिक दवाएं बनाने वाले भारतीय दवा उद्योग को इससे 91,576 करोड़ रुपये का कारोबार मिलेगा। वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता वाले एक कार्यबल की रिपोर्ट के अनुसार, अगले 3 साल में जो दवाएं पेटेंटमुक्त हो जाएंगी उनमें से 15 प्रतिशत का भारत में उत्पादन हो सकता है।
जेनेरिक दवाएं ऐसे ब्रांडेड उत्पादों की नकल होती हैं, जिनका पेटेंट समाप्त हो जाता है। इनकी कीमत भी काफी कम होती है। दवा निर्यात संवर्ध्दन परिषद के अनुसार, दिसंबर में भारत का दवा निर्यात 46.3 फीसदी के इजाफे के साथ 1.01 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
साल 2008-09 के पहले 9 महीने में विदेशी बाजार में भारतीय दवाओं की बिक्री 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी के 8.44 अरब डॉलर पर पहुंच गई थी।