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टावर अधिग्रहणों को लगा ग्रहण

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Last Updated- December 08, 2022 | 7:07 AM IST

दूरसंचार उद्योग में मंदी के असर का सबसे पहला संकेत दूरसंचार टावर कंपनियों के अधिग्रहण की योजनाओं को टालने के साथ दिखना शुरू हो गया है।


वैश्विक बाजार में नकदी संकट और मूल्यांकन में कमी के कारण अधिग्रहणों की संख्या में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है।

बमुश्किल दो महीने पहले ही बुनियादी ढांचा कारोबार से जुड़ी प्रमुख कंपनी भारती इन्फ्राटेल, जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्विपो टेलीकॉम और रिलायंस टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड आदि अधिग्रहण या विनिवेश की संभावनाएं तलाश रहीं थीं।

हालांकि कंपनियां अपनी योजनाओं की स्थिति पर टिप्पणी नहीं करना चाहती, लेकिन करारों से जुड़े मचर्ट बैंकरों का कहना है कि ज्यादातर मौजूदा अधिग्रहण मुश्किल दौर में अटके पड़े हैं।

इसके अलावा दूरसंचार उद्योग पर वित्तीय संकट का असर उनके मूल्यांकन में कमी के रूप में देखा जा सकता है।

कई अधिग्रहणकर्ताओं पहले मोल-भाव की हुई कीमतों का दोबारा मूल्यांकन करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

एक मचर्ट बैंकर के अनुसार टावर मूल्यांकन बाजार गुणक सिध्दांत पर आधारित होते हैं। इस सिध्दांत के तहत टावर की कीमत की तुलना पहले हुए उसी तरह के करारों से की जाती है।

लेकिन मंदी ने अधिग्रहणकर्ताओं पर नकद प्रवाह पर ध्यान देने और प्रति टावर कमाई के अनुसार मूल्यांकन करने का दबाव बनाया है, जिसके कारण इन कंपनियों के मूल्यांकन में अहम गिरावट देखी गई है। उनका कहना है कि स्थिति को ‘अनुमानित मूल्यांकन और प्रस्तावित मूल्यांकन’ के बीच अंतर ने और भी बद्तर कर दिय है।

दौलत कैप्टिल की विशेषज्ञ प्रियंक चंद्रा का कहना है, ‘वित्तीय संकट के कारण नकदी संकट आ गया है हमारा मानना है कि कंपनियों को अपने प्रस्तावित अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए पैसा उगाहने में मुश्किल हो रही है। इसका असर पाइपलाइन के करारों पर भी पड़ेगा।’

भारत को 2011 तक 3,80,000 सेल साइटों की जरूरत होगी ताकि वे लगातार बढ़ते ग्राहकों को सेवाएं मुहैया करा सकें और कंपनियों को इस संख्या तक पहुंचने के लिए और 1,50,000 टावर लगाने होंगे।

करार पर तलवार

टाटा टेली – क्विपो टेलीकॉम
जीटीएल इन्फ्रा – एस्सार टेलीकॉम
आईडीएफसी – एक्सल एस्टर में विनिवेश

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First Published - December 4, 2008 | 10:56 PM IST

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