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केयर्न मामले पर माथापच्ची जारी

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Last Updated- December 12, 2022 | 8:01 AM IST

भारत सरकार और केयर्न एनर्जी में कर विवाद पर बीच का रास्ता निकालने के लिए जमकर माथापच्ची हुई है। दोनों पक्षों के बीच 1.2 अरब डॉलर के कर विवाद पर एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय ने केयर्न के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया है, लेकिन सरकार इसके खिलाफ अपील करने की अपनी मंशा पहले ही जाहिर कर चुकी है।
हालांकि सरकार और केयर्न ने आपसी सहमति से कोई समाधान खोजने के लिए बातचीत की पहल भी की है। पिछले सप्ताह दोनों पक्षों की तरफ से कई उपाय सुझाए गए, जिनमें पूंजीगत लाभ की गणना और ‘विवाद से विश्वास’ विवाद निपटान योजना पर भी चर्चा की गई। मगर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि सरकार ने 21 दिसंबर को आए ‘द हेग’ स्थित मध्यस्थता न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने का मन बना चुकी है।
केयर्न एनर्जी ने रविवार को कहा कि उसे उम्मीद है कि भारत सरकार के साथ कर विवाद पर एक ऐसा समाधान ढंूढ़ा जा सकता है जो दोनों पक्षों को मान्य हो।  समझा जा रहा है कि केयर्न एनर्जी ने 2006-07 के सौदे पर की गई कर की गणना पर सवाल  उठाए हैं।
कंपनी का कहना है कि कर की गणना लघु अवधि के पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) के बजाय दीर्घ अवधि के पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) के आधार पर की जानी चाहिए थी। कंपनी के अनुसार एलटीसीजी आधार पर गणना होने से देनदारी 10,500 करोड़ रुपये के बजाय 1,800 से 2,000 करोड़ रुपये होती।
सूत्रों ने कहा कि केयर्न ने भारत में वर्ष 1998 में निवेश किया था और 2006-07 में देश से बाहर चली गई थी। कंपनी को उसके निवेश पर इस दौरान हुए प्राप्त हुए मुनाफे पर 10 प्रतिशत दर पर या इंडेक्सेशन के साथ 20 एलटीसीजी कर लगा होता। हालांकि इस देनदारी से बचने के लिए केयर्न ने 2006 में केयर्न यूके होल्डिंग लिमिटेड (सीयूएचएल) की स्थापना कर अपने भारतीय कारोबार का पुनर्गठन कर दिया और कई सहायक इकाइयां खड़ी कर दीं। हालांकि इसके बाद कंपनी पर एसटीसीजी कर देनदारी बन गई। केयर्न ने आयकर अपील न्यायाधिकरण (आईटीएटी) में यह मामला उठाया था, लेकिन वहां यह मुकदमा हार गई। एक सूत्र ने कहा कि एलटीसीजी के आधार पर कर की गणना दोबारा की जाए तो मौजूदा विवाद का हल निकल सकता है।  
केयर्न कह चुकी है कि वह पुरानी बातें भूलकर भारत में निवेश करना चाहती है। कंपनी ने अपने बयान में कहा, ‘हमने तमाम बातों के बावजूद मौजूदा मामले का एक समाधान खोजने के लिए कई प्रस्तावों पर चर्चा की है। हमें लगता है कि कोई समाधान जरूर निकल सकता है और पिछली बातें भूलकर भारत में नए निवेश करना चाहते हैं।’
भारत सरकार ने केयर्न को ‘विवाद से विश्वास’ योजना के तहत मामले का समाधान करने के लिए कहा है। यह योजना 28 फरवरी तक खुली है। विवादित कर मामलों का निपटारा करने के लिए सरकार ने यह योजना शुरू की है जिसके तहत संबंधित इकाई वास्तविक कर मांग पर सरकार के साथ मिलकर मामले का समाधान पा सकती हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘केयर्न के लिए विवाद से विश्वास योजना के तहत मामले का हल निकालना सबसे उपयुक्त विकल्प होगा। यह योजना अभी भी प्रभाव में है। कंपनी इस योजना को जरिया बनाकर मामले का निपटारा कर सकती है।’ केयर्न पहले कह चुकी है कि वह इस योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहती है।
केयर्न ने 2006-07 में अपने भारतीय कारोबार का पुनर्गठन किया था, जिससे प्राप्त आय पर सरकार ने 24,500 करोड़ रुपये रकम कर के रूप मेंं मांगी थी। केयर्न ने सरकार की कर मांग के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में अपील की थी और निर्णय उसके पक्ष में आया था। कंपनी ने कहा कि पिछली तारीख से लागू होने वाले कर कानून के तहत 2014 में उसकी परिसंपत्तियों का जब्त किया जाना किसी पक्ष के हित में नहीं है। कंपनी ने कहा कि वह इस पुराने मामले को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखना चाहती है। भारत सरकार द हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय में 10 मार्च तक एक अपील दायर कर सकती हैऔर फिलहाल नीदरलैंड में वकीलों से बातचीत कर रही है। भारत सरकार के पास अपील के लिए 21 मार्च तक का समय है। सरकार मुख्यत: दो बिंदुओं- न्याय क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय लोक नीति- के आधार पर मध्यस्थता न्यायालय के आदेश को चुनौती देगी। केयर्न एनर्जी ने मध्यस्थता न्यायालय का आदेश लागू कराने के लिए अमेरिका के एक जिला न्यायालय में अपील की थी। इससे पहले ने नीदरलैंड की अदालत में भी एक ऐसी अपील कर चुकी है।
भारत सरकार अपनी अपील में यह तर्क दे सकती है कि उसे कर लगाने का संप्रभु अधिकार है और कोई निजी पक्ष इस मामले पर निर्णय नहीं ले सकता है। मध्यस्थता न्यायालय का निर्णय द्विपक्षीय निवेश संधि के दायरे में नहीं आता है और यह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके अलावा सरकार अंतराष्ट्रीय लोक नीति का भी यह कहते हुए हवाला दे सकती है कि केयर्न ने दुनिया में किसी भी न्याय क्षेत्र में कर नहीं दिया है।

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First Published - February 21, 2021 | 11:18 PM IST

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