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नहीं छूट रही बंगाल से टाटा की ‘ममता’

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:56 AM IST

पश्चिम बंगाल से टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना को हटे हुए अभी पांच महीने भी नहीं हुए, पर टाटा ग्रुप पश्चिम बंगाल में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च करने को तैयार है।
एक सूत्र ने बताया कि दो हफ्ते के भीतर राजरहाट में 50 एकड़ में फैले एक एकीकृत टाउनशिप योजना के पहले चरण की घोषणा की जाएगी। इस परियोजना के तहत आवासीय, वाणिज्यिक और रिटेल का निर्माण शामिल है। पहले चरण के अंतर्गत आवासीय परियोजना को अमली जामा पहनाया जाएगा।
हालांकि सूत्र ने अपार्टमेंटों की कीमत का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इशारा किया कि इस परियोजना में मध्य आय वर्ग (एमआईजी) और उच्च आय वर्ग (एचआईजी) के लिए आवास की व्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। हालांकि शुरूआती कीमत 60 लाख रुपये के करीब होगी।
इस परियोजना के साथ टाटा हाउसिंग क्षेत्र में पश्चिम बंगाल में अपना पैर पसारेगी, साथ ही सिंगुर से हटने के बाद टाटा की यह पहली कोई परियोजना होगी। टाटा हाउसिंग के पास राजरहाट में पहले से 50 एकड़ की जमीन मौजूद है। यह जमीन कंपनी ने पश्चिम बंगाल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (हिडको) से खरीदी थी।
सूत्र ने बताया कि यह जमीन दो साल पहले खरीदी गई थी, लेकिन बाजार में मंदी की वजह से यहां पर परियोजना शुरू नहीं की जा सकी। उद्योग जानकारों का मानना है कि लगभग उसी समय कंपनी नैनो के लिए भू-आवंटन संबंधी समस्या से जूझ रही थी। हालांकि टाटा हाउसिंग ने यह जमीन कितने में खरीदी थी, इसकी कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आर्थिक संकट से पहले राजरहाट में जमीन की कीमतें आसमान छू रही थी, क्योंकि उस समय कई आईटी कंपनियां यहां जमीन लेने की ताक में लगी थी। सूत्र ने बताया, ‘हमलोग राजरहाट में जमशेदपुर की तरह टाउनशिप विकसित करना चाहते हैं।’
आवासीय परियोजना के तहत पांच एकड़ में मकान बनाए जाएंगे, जिसमें तीन टावर विकसित किए जाएंगे। इसमें दो और तीन बेडरूम के अपार्टमेंट बनाए जाएंगे।
दुनिया में भी बढ़ा दबदबा
टाटा कम्युनिकेशंस ने 60 करोड़ डॉलर के वेस्ट अफ्रीकन केबल सिस्टम का हिस्सा बनने का ऐलान किया है। इस कदम के साथ ही टाटा टेलीकॉम बहुराष्ट्रीय टेलीकॉम कंपनियों के उस समूह का हिस्सा बन गई है, जिसे सिस्टम के निर्माण और देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। 
डब्ल्यूएसीएस समुद्र ने नीचे बनाए उस फाइबर ऑप्टिक केबल का नाम है, जो अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से को पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप से जोड़ेगी।

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First Published - April 16, 2009 | 10:08 PM IST

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