आर्थिक मंदी से बेहाल टाटा स्टील की कोरस अपने ब्रिटेन और नीदरलैंड में टयूब कारोबार में लगे 146 कर्मियों की छंटनी करने का विचार बनाया है।
पिछले महीने ही कोरस ने मौजूदा वैश्विक आर्थिक मंदी के मद्देनजर अपने वितरण कारोबार में 400 कर्मियों की छंटनी करने का फैसला लिया था।
यह छंटनी कंपनी की ब्रिटेन और आयरलैंड की वितरण इकाई में की गई थी, जहां कंपनी ने 36 अलग-अलग जगहों पर 2,400 लोगों को रोजगार मिला हुआ था।
कंपनी ने अपने कहा है कि उसने कोरस टयूब्स के ब्रिटेन और नीदरलैंड में मूल संयंत्रों में हर स्तर पर रोजगार में कमी करने का फैसला लिया है।
कंपनी के इस फैसले के साथ 146 कर्मियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। इसमें कॉर्बी में 56, हार्टलपूल में 49 और नीदरलैंड में 41 कर्मी शामिल हैं।
कोरस टयूब्स ने ब्रिटेन और नीदरलैंड में 2,200 लोगों को रोजगार दिया है। कोरस टयूब्स के सक्रिय प्रबंध निदेशक निक क्लार्क का कहना है, ‘यह काफी दुखदायी है कि हमें अधिक लोगों को बाहर करना पड़ रहा है। हालांकि हमें ये बदलाव अपने कारोबार और चुनौतीपूर्ण बाजार स्थितियों को देखते हुए करने पड़ रहे हैं।’
कंपनी ने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता अपने कर्मचारियों को बदलावों के साथ हमेशा तैयार रखने और मुश्किल दौर में उनकी मदद करना है।’
कोरस टयूब्स कोरस की ही एक कारोबारी इकाई है और इस्पात की टयूबें बनाती है। इन टयूबों का इस्तेमाल निर्माण, ऑटोमोटिव, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और भवन निर्माण सेवाओं में होता है।
28 नवंबर को कोरस की इस कारोबारी इकाई ने अपने कर्मचारियों और उसके मजदूर संघ के प्रतिनिधियों के साथ सलाह की प्रक्रिया शुरू की थी।
कंपनी के वक्तव्य में बताया गया है कि कोरस टयूब्स अधिक संख्या में छंटनी पर रोक लगाने के लिए संभावित विकल्प तलाशने और उसके परिणामों को भी कम करने की कोशिश कर रही है।
जनवरी 2007 में टाटा स्टील की ओर से किए गए अधिग्रहण से अब तक कंपनी के वितरण कारोबार में पहली बार छंटनी की घोषाणा की गई है।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मंदी के कारण कई कंपनियों को लागत घटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने परिचालन कार्यों में छंटनी की घोषणा करनी पड़ी है।
मंदी का असर इस्पात की मांग पर भी देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से इस्पात की कीमतों में काफी गिरावट हुई है।
उदाहरण के लिए हॉट रोल्ड कॉयल की कीमतें जुलाई में 62,500 प्रति टन से लगभग आधा होकर मौजूदा समय में 30,000 से 32,500 रुपये प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई हैं।
उत्पादन और मांग में संतुलन बनाने के लिए कोरस ने तीसरी तिमाही के दौरान उत्पादन में 20 प्रतिशत की कटौती के बाद अब चौथी तिमाही में 30 प्रतिशत कटौती की घोषणा कर दी है।