पिछले एक दशक से भी अधिक समय तक सुस्त रहने के बाद टाटा स्टील अचानक शेयर बाजार के सबसे आकर्षक शेयरों में शामिल हो गया है। अप्रैल में अब तक कंपनी के बाजार पूंजीकरण में करीब 27 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। सितंबर 2020 के बाद उसमें तिगुना वृद्धि दर्ज की गई है जबकि इस दौरान बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स में 28 फीसदी की बढ़त रही।
टाटा स्टील का शेयर गुरुवार को सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। यह दिनभर के कारोबार के बाद 6.1 फीसदी बढ़त के साथ 1,031.6 रुपये की अपनी सर्वकालिक ऊंचाई पर बंद हुआ। साथ ही यह पहला अवसर था जब टाटा स्टील का शेयर मूल्य चार अंकों में पहुंच गया। टाटा स्टील के निवेशकों ने इस शेयर में अपने निवेश पर कमाई करने के लिए करीब एक दशक का इंतजार किया है। इस शेयर को 2007 की अपनी 924 रुपये की ऊंचाई को पार करने में करीब 13 साल लग गए।
इस्पात शेयरों में तेजी का तात्कालिक कारण चीन की सरकार द्वारा देश में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को हतोत्साहित करना है जिसमें इस्पात उद्योग भी शामिल है। चीन की सरकार ने हॉट रोल्ड स्टील सहित 100 से अधिक उत्पादों पर निर्यात सब्सिडी को वापस ले लिया है। इसके अलावा वहां की सरकार देश में इस्पात के आयात पर लगने वाले आयात शुल्क में भी कटौती की है।
विश्लेषकों का कहना है कि चीन के इस हालिया कदम से वैश्विक स्तर पर इस्पात की कीमतों में तेजी आएगी और चीन से इस्पात का निर्यात कम होगा। इससे टाटा स्टील जैसी वैश्विक पहुंच रखने वाली भारतीय भारतीय धातु विनिर्माताओं को फायदा होगा।
नारनोलिया सिक्योरिटीज के सीआईओ शैलेंद्र कुमार ने कहा, ‘चीन संकेत दे रहा है कि अब वह अपने घरेलू इस्पात उत्पादन को सीमित करना चाहता है क्योंकि उसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण को कम करना है। इससे भारतीय इस्पात विनिर्माताओं के लिए निर्यात की संभावनाएं पैदा होंगी और देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण किसी भी संभावित गिरावट की भरपाई करने में मदद मिलेगी।’
विश्लेषकों का मानना है कि साल 2020 में कोविड-19 के प्रकोप के कारण आर्थिक गतिविधियों में हुई गिरावट के बाद वैश्विक आर्थिक सुधार में इस्पात की अहम भूमिका होगी। सिस्टेमैटिक्स ग्रुप के प्रमुख (संस्थागत इक्विटी) धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) भारत को छोड़कर अन्य सभी जी20 देशों में ऊपर है। इससे धातुओं, विशेष तौर पर इस्पात की जबरदस्त मांग का संकेत मिलता है। मांग में वृद्धि ऐसे समय में दिख रही है जब इस्पात कंपनियां मामूली अथवा शून्य इन्वेंट्री के साथ परिचालन कर रही हैं। इससे मूल्य प्राप्तियां अधिक होंगी और मुनाफे में वृद्धि होगी।’
सिन्हा के अनुसार, इस्पात कंपनियों को अमेरिकी डॉलर में गिरावट का भी फायदा मिल रहा है। अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल में हालिया गिरावट के कारण डॉलर में नरमी आई है। डॉलर में गिरावट आने का मतलब इस्पात सहित अन्य धातुओं की कीमतों में तेजी है।
विश्लेषकों का मानना है कि टाटा स्टील उन कंपनियों में शामिल है जिन्हें वैश्विक स्तर पर इस्पात की कीमतों और मांग में सुधार होने का फायदा मिलेगा। कंपनी को उसके यूरोपीय कारोबार से करीब 50 फीसदी राजस्व हासिल होता है। जबकि अन्य भारतीय इस्पात कंपनियां मुख्य तौर पर घरेलू बाजार पर केंद्रित हैं।
टाटा स्टील को उद्योग की अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम मूल्यांकन का भी फायदा होगा। कंपनी का शेयर फिलहाल 3.4 गुना एंटरप्राइज वैल्यू बनाम बुक वैल्यू अनुपात पर कारोबार कर रहा है जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील के मामले में यह आंकड़ा 5.8 गुना है। टाटा स्टील बाजार पूंजीकरण बनाम बुक वैल्यू अनुपात और एंटरप्राइज वैल्यू बनाम एबिटा यानी परिचालन मुनाफा अनुपात के मोर्चे पर भी सस्ता है।
टाटा स्टील का मौजूदा एंटरप्राइज वैल्यू 2.21 लाख करोड़ रुपये है जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील के मामले में यह आंकड़ा 2.18 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि जेएसडब्ल्यू स्टील का बाजार पूंजीकरण टाटा स्टील के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले करीब 50 फीसदी अधिक है।
विश्लेषकों का मानना है कि टाटा स्टील का शेयर मूल्य अगले दो वर्षों के दौरान ऋण बोझ में गिरावट के साथ बढ़त दर्ज करेगा। सिस्टेमैटिक्स ग्रुप ने टाटा स्टील के शेयर के लिए 1,200 रुपये का लक्ष्य रखा है जो मौजूदा मूल्य से करीब 20 फीसदी अधिक है।