इस्पात उत्पादन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी टाटा स्टील ने मार्च तिमाही में 1,499.45 करोड़ रुपये का कर पूर्व एकीकृत नुकसान दर्ज किया है जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी को 4,252.50 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। कमजोर राजस्व और कुछ असाधारण खर्च के कारण कंपनी की आय प्रभावित हुई।
वित्त वर्ष 2020 की आखिरी तिमाही में कंपनी का राजस्व 32,866 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20 फीसदी कम है क्योंकि सुस्त होती अर्थव्यवस्था के बीच कमजोर मांग से देसी और विदेशी परिचालन पर असर पड़ा।
इसके अलावा कुछ असाधारण खर्च मसलन कर्मचारी को अलग करने पर मुआवजा, इम्पेयरमेंट, पुनर्गठन आदि के कारण कुल नुकसान 3,405.85 करोड़ रुपये रहा और इससे कंपनी की आय पर असर पड़ा। यूरोप में कुछ परिसंपत्तियों, विदेशी खनन और देसी परिचालन के एम्पेयरमेंट के लिए 3,141.43 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ, जो सबसे ज्यादा था।
असाधारण खर्च में भारतीय परिचालन ने 2,009 करोड़ रुपये का योगदान किया। असाधारण श्रेणी में आय वाला एकमात्र मद सहायक व गैर-चालू निवेश की बिक्री पर हुआ लाभ रहा, जो महज 40.63 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी ने 1,615.35 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध नुकसान दर्ज किया जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी को 2,295.25 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
भारतीय परिचालन में सालाना आधार पर राजस्व में तेज गिरावट आई और यह मार्च तिमाही में करीब 26 फीसदी घटकर 13,698.80 करोड़ रुपये रही। इसने समीक्षाधीन अवधि में परिचालन लाभ घटाकर 1,913 करोड़ रुपये कर दिया, जो पिछले साल की समान अवधि में 3,876 करोड़ रुपये रहा था। कर पूर्व एकल नुकसान मार्च तिमाही में 96 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 3,865 करोड़ रुपये रहा था। भारतीय परिचालन से शुद्ध नुकसान 437 करोड़ रुपये पर पहुंच गया क्योंकि 341 करोड़ रुपये के कर ने मुनाफे को नीचे खींच लिया। पिछले साल की समान अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,491 करोड़ रुपये रहा था।
सीईएससी का कर पूर्व लाभ 11 फीसदी घटा
कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से सीईएससी लिमिटेड का कर पूर्व लाभ मार्च तिमाही में 11 फीसदी घटकर 482 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी के राजस्व में 5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 2,433 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, बावजूद उसके लाभ में कमी दर्ज हुई। पिछले साल की समान अवधि में कर पूर्व लाभ व राजस्व क्रमश: 542 करोड़ रुपये व 2,308 करोड़ रुपये रहा था। टैक्स क्रेडिट से समायोजित किए जाने के बाद शुद्ध लाभ छह फीसदी बढ़कर 446 करोड़ रुपये रहा।
स्पेंसर रिटेल का कर पूर्व घाटा 49.45 करोड़ रुपये
राजस्व 22.27 फीसदी बढ़कर 640.05 करोड़ रुपये पर पहुंचने के बाद भी मार्च तिमाही में स्पेंसर रिटेल का कर पूर्व नुकसान 49.45 करोड़ रुपये रहा, जिसकी वजह वित्तीय लागत, ह्रास आदि में तीव्र बढ़ोतरी रही। कंपनी ने पिछले साल की समान अवधि में 523.46 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था और कर पूर्व लाभ 1.22 करोड़ रुपये था। समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का शुद्ध नुकसान 49.26 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल की समान अवधि में उसे 1.83 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
शोभा लिमिटेड का लाभ 5 फीसदी घटा
बेंगलूरु की रियल्टी कंपनी शोभा लिमिटेड का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2019- 20 में 5 फीसदी घटकर 281.5 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी की आय और बिक्री मजबूत रही। एक साल पहले 2018-19 में कंपनी का शुद्ध लाभ 297.1 करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की कुल आय एक साल पहले के 3,515.6 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,825.7 करोड़ रुपये रही। वहीं वित्त वर्ष 2019- 20 की चौथी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ तेजी से घटकर 50.7 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने 113.3 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। वित्त वर्ष की मार्च तिमाही (जनवरी से मार्च 2020) के दौरान कंपनी की कुल आय भी 1,421.6 करोड़ रुपये से घटकर 927.6 करोड़ रुपये रह गई।
एमआरएफ का कर पूर्व लाभ घटा
टायर निर्माता एमआरएफ का कर पूर्व लाभ मार्च, 2020 में समाप्त तिमाही में घटकर 291.81 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 408.83 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी की कुल आय इस अवधि में 3,682.66 करोड़ रुपये रह गई, जो जो पिछले साल की समान अवधि में 4,182.92 करोड़ रुपये रही थी। कंपनी ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने कारोबारी माहौल व अर्थव्यवस्था को काफी ज्यादा प्रभावित किया है। लॉकडाउन के कारण मार्च तिमाही में कुल आय में दिसंबर तिमाही के मुकाबले 399.57 करोड़ रुपये की कमी दर्ज हुई और पिछले साल की मार्च तिमाही के मुकाबले उसमें 500.26 करोड़ रुपये की कमी आई। लॉकडाउन खत्म होने के बाद कंपनी का ज्यादातर परिचालन बहाल हो गया है। टायर उद्योग बाजार की मांग की समस्या का सामना कर रहा है क्योंकि ऑटोमोबाइल क्षेत्र काफी समय से मुसीबत झेल रहा है। आगे की राह स्पष्ट नहीं है क्योंकि महामारी ने वाहन व टायर दोनों क्षेत्रों के लिए अनिश्चितता पैदा की है। हालांकि कंपनी ने कहा कि टायर के आयात पर पाबंदी की सरकार की घोषणा से टायर उद्योग को मुश्किल समय में मदद मिल सकती है।