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ग्रीन स्टील की ओर टाटा स्टील की लंबी छलांग, ₹3,200 करोड़ की लागत से शुरू हुआ देश का पहला EAF प्लांट

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यह कंपनी का पहला स्क्रैप-आधारित ईएएफ है जिसे प्रति टन स्टील पर 0.3 टन से कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिए डिजाइन किया गया है

Last Updated- March 20, 2026 | 10:19 PM IST
Tata Steel
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

टाटा स्टील ने शुक्रवार को पंजाब के लुधियाना में 3,200 करोड़ रुपये की लागत से स्क्रैप आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) का परिचालन शुरू किया। इसकी क्षमता 7.5 लाख टन सालाना है। यह पर्यावरण के अनुकूल इस्पात उत्पादन की दिशा में यह कंपनी की बड़ी उपलब्धि है।

यह कंपनी का पहला स्क्रैप-आधारित ईएएफ है जिसे प्रति टन स्टील पर 0.3 टन से कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिए डिजाइन किया गया है। यह करीब 50 फीसदी अक्षय ऊर्जा पर चलेगा। इसमें कच्चे माल के रूप में 100 फीसदी स्टील स्क्रैप का उपयोग होगा, जिसमें से लगभग 40 फीसदी हरियाणा के रोहतक स्थित कंपनी के रीसाइक्लिंग संयंत्र से ली जाएगी।

उद्घाटन समारोह में पंजाब के मुख्यमंत्री एस भगवंत सिंह मान और टाटा स्टील के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के साथ-साथ टाटा स्टील के सीईओ व प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद थे।

इस आयोजन को महत्त्वपूर्ण उपलब्धि और ऐतिहासिक अवसर बताते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि समूह के पास अपनी सभी कंपनियों में सस्टैबिलिटी के लिए व्यापक कार्यक्रम है। हमारा लक्ष्य 2045 तक सभी कंपनियों में कार्बन उत्सर्जन खत्म करना है और जिस कंपनी के सामने शायद सबसे कठिन चुनौती है, वह है टाटा स्टील।

उन्होंने कहा, टाटा स्टील में आज हमारी इस्पात उत्पादन क्षमता 3.5 करोड़ टन है। इसमें से 2.5 करोड़ टन भारत में है और बाकी 1 करोड़ टन यूरोप और ब्रिटेन में है। चंद्रशेखरन ने बताया कि ब्रिटेन में 30 लाख टन इस्पात को हरित इस्पात में परिवर्तित किया जा रहा है। यूरोप में अगले 10 वर्षों में 70 लाख टन क्षमता को हरित इस्पात में परिवर्तित करने के प्रयास जारी हैं।  

टाटा स्टील के चेयरमैन ने बताया, भारत में यह बहुत मुश्किल होने वाला है क्योंकि हम अपनी उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रहे हैं। मौजूदा 2.5 करोड़ टन क्षमता से टाटा स्टील 65 लाख टन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें से 50 लाख टन नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) में और 15 लाख टन मेरामंडली संयंत्र में जोड़ी जाएगी। लेकिन यह क्षमता ब्लास्ट फर्नेस आधारित होगी।

चंद्रशेखरन ने कहा, इसलिए हमें हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में अपना सफर शुरू करना होगा और इस दिशा में पहला कदम लुधियाना की ईएएफ है। उन्होंने कहा कि करीब 10 लाख टन क्षमता वाली यह परियोजना एक आदर्श है। उन्होंने कहा, हम पहले से ही इसे कम से कम 4 या 5 अलग-अलग उन स्थानों पर दोहराने की बात कर रहे हैं, जहां हमें देश में कच्चा माल मिल सके। यह संयंत्र कंपनी के प्रमुख रिटेल ब्रांड टाटा टिस्कोन के तहत निर्माण ग्रेड की स्टील रीबार का उत्पादन करेगा। टाटा स्टील के सीईओ और प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन ने एक बयान में कहा कि लुधियाना ईएएफ 2045 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में टाटा स्टील की यात्रा में महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।

नरेंद्रन ने कहा, यह दर्शाता है कि टाटा स्टील सर्कुलर इकॉनमी में पूंजी निवेश पर पुनर्विचार कर रही है, ऐसी प्रौद्योगिकियों का समर्थन करके जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रहते हुए संसाधनों के आधिक्य को कम करती हैं।

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First Published - March 20, 2026 | 10:19 PM IST

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