इस बात पर आम सहमति बनती दिख रही है कि नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक का कारोबार करने वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस नियामकीय नियमों में हालिया बदलावों के बाद भी ऊपरी स्तर वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के तौर पर वर्गीकृत रहेगी। ऊपरी स्तर वाली एनबीएफसी कंपनियों को निर्धारित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के परिसंपत्ति आधारित मानदंडों पर प्रतिक्रिया देते हुए कई विश्लेषकों और ब्रोकरेज कंपनियों ने संकेत दिया कि वर्गीकरण के मामले में टाटा संस की यथास्थिति बनी रहेगी, जिससे सूचीबद्धता की जरूरत बढ़ जाएगी।
टाटा संस को साल 2022 में आरबीआई के आकार आधारित नियमों के तहत ऊपरी स्तर वाली एनबीएफसी के तौर पर वगीकृत किया गया था। बैंकिंग नियामक ने पिछले सप्ताह एनबीएफसी-यूएल वर्गीकरण के मसौदा नियम जारी किए। इसमें जटिल आकलन वाली पद्धति के स्थान पर शुद्ध रूप से परिसंपत्ति के आकार की 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा को आधार बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
अगर प्रस्तावित मसौदा नियमों को लागू किया जाता है, तो टाटा संस के पास सूचीबद्धता की जरूरतों से बचने की काफी कम गुंजाइश रहेगी जब तक कि आरबीआई कंपनी के अनुरोध पर छूट न दे दे। साल 2024 में टाटा संस ने आरबीआई से संपर्क किया और कर्ज मुक्त होने के बाद मुख्य निवेश कंपनी (सीआईसी) का अपना लाइसेंस वापस करने का अनुरोध किया था, ताकि वह निजी गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनी रहे। यह आवेदन 30 सितंबर, 2025 की सूचीबद्धता की समय सीमा बीत जाने के बाद भी समीक्षाधीन है।
मैक्वारी कैपिटल के प्रबंध निदेशक और वित्तीय सेवा अनुसंधान प्रमुख सुरेश गणपति ने कहा, ‘हमारी राय में ऊपरी स्तर वाली एनबीएफसी को पूरी तरह से परिसंपत्ति के आकार के आधार पर वर्गीकृत करने वाले मसौदा दिशानिर्देशों के तहत टाटा संस ऊपरी एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत बनी रहेगी।’ गणपति ने कहा कि नियामकीय विवेक और जटिल आकलन पद्धति हटाए जाने के बाद अगर मसौदा दिशानिर्देश बिना किसी बड़े बदलाव के लागू हो जाते हैं, तो संभव है कि टाटा संस प्रस्तावित नियमों के तहत छूट की पात्र न रहे।
नियोस्ट्रैट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक अबीजर दीवानजी ने बताया कि टाटा संस ऊपरी स्तर वाली एनबीएफसी है, यह प्रमुख निवेश कंपनी के तौर पर योग्य है या नहीं, यह अभी निर्धारित होना बाकी है। हालांकि यह देखते हुए कि उसका परिसंपत्ति आकार एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, तकनीकी तौर पर इसे ऊपरी स्तर में वर्गीकृत किया जाएगा, जब तक कि वह आरबीआई को इस बात के लिए नहीं मना ले कि वह सीआईसी के रूप में पात्र नहीं है।
ऊपरी स्तर वाले इस वर्गीकरण से न केवल सूचीबद्धता की जरूरत होगी, बल्कि पर्याप्त पूंजी के कड़े मानदंड भी लागू होंगे। केंद्रीय बैंक ने प्रस्ताव भी दिया है कि अगर सरकार से समर्थित एनबीएफसी इस सीमा को पार करती हैं, तो उन्हें भी इसी श्रेणी में लाया जाएगा। वर्तमान में ऐसी कंपनियां बुनियादी या मध्य स्तर में रहती हैं और उन्हें ऊपरी स्तर से बाहर रखा जाता है।
इसके परिणामस्वरूप पीएफसी, हुडको और आईआरएफसी समेत कई सरकार समर्थित एनबीएफसी को ऊपरी स्तर वाली एनबीएफसी की सूची में शामिल किया जा सकता है। इस सूची में फिलहाल 15 एनबीएफसी शामिल हैं।