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टाटा ने नकारी मिस्त्री की पेशकश

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Last Updated- December 14, 2022 | 8:21 PM IST

टाटा समूह ने मिस्त्री परिवार से विवाद सुलझाने के लिए मिला प्रस्ताव ठुकरा दिया है। मिस्त्री परिवार ने टाटा संस की परिसंपत्तियां बांटने की पेशकश की थी, जिसमें सूचीबद्घ कंपनियों में टाटा संस की हिस्सेदारी भी शामिल थी। उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान आज वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने टाटा समूह का पक्ष रखते हुए यह प्रस्ताव नकार दिया। कुछ दिन पहले ही टाटा समूह ने टाटा संस में मिस्त्री की हिस्सेदारी का आकलन करीब 80,000 करोड़ रुपये किया था।
शीर्ष न्यायालय में इस समय दोनों पक्षों के बीच साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाने के बाद पैदा हुए विवाद पर सुनवाई हो रही है। साल्वे ने न्यायालय में कहा कि मिस्त्री परिवार टाटा ब्रांड में 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी सहित परिसंपत्तियां विभाजित करने की मांग कर रहा है। साल्वे ने कहा, ‘मिस्त्री ने टाटा ब्रांड को नुकसान पहुंचाया है और इसके बाद उन्हें किसी तरह पुरस्कार नहीं दिया जा सकता है। न्यायालय टाटा को केवल उचित बाजार मूल्य पर हिस्सेदारी खरीदने के लिए कह सकता है।’
अदालत में सुनवाई शुरू होने से कुछ दिन पहले ही मिस्त्री परिवार ने टाटा की सूचीबद्ध कंपनियों-टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस), टाटा मोटर्स और टाटा स्टील- में हिस्सेदारी के बदले टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी। मिस्त्री परिवार ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी की कीमत 1.75 लाख करोड़ रुपये लगाई थी। उस समय टाटा समूह ने मिस्त्री परिवार की पेशकश का कोई जवाब नहीं दिया था और न्यायालय में जवाब देने के लिए कहा था। साल्वे ने कहा कि परिसंपत्तियां विभाजित करने की मिस्त्री परिवार की मांग टाटा संस को बंद करने के बराबर है। उन्होंने कहा, ‘इस विवाद का एकमात्र समाधान यह है कि किसी एक पक्ष को पीछे हटना होगा और अल्पांश शेयरधारक से ही झुकने को कहा जा सकता है। केवल मिस्त्री परिवार को उनकी हिस्सेदारी बेचने के लिए कहा जा सकता है।’
शीर्ष न्यायालय राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के एक आदेश के खिलाफ टाटा समूह की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। पिछले वर्ष दिसंबर में एनसीएलएटी ने अपने आदेश में साइरस मिस्त्री को टाटा समूह के चेयरमैन पद पर बहाल करने का आदेश दिया था और चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को गैर कानूनी करार दिया था। इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने फैसला टाटा समूह के पक्ष में दिया था। अब मामला उच्चतम न्यायालय में है।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान मिस्त्री परिवार के वकील सीए सुंदरम ने कहा कि साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से इसीलिए हटाया गया था क्योंकि वह कंपनी प्रशासन का ऐसा प्रस्ताव रखने जा रहे थे, जिसके हिसाब से टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका सीमित की जानी थी। उसमें यह भी कहा गया था कि टाटा समूह की सभी कंपनियों के हर मामले में फैसले का अधिकार केवल ट्रस्ट्स द्वारा नामित दो निदेशकों के पास ही नहीं रहेगा। सुंदरम ने पूछा कि यदि टाटा संस व्यापक प्रबंधन वाली कंपनी है मगर टाटा ट्स्ट्स द्वारा नामित दो निदेशक ही यदि उसे चला रहे हैं तो कोई भी मामला निदेशक मंडल के सामने लाने की क्या तुक है।

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First Published - December 11, 2020 | 1:21 AM IST

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