पिछले हफ्ते नैनो को लॉन्च करने के बाद देश की प्रमुख ऑटो कंपनी, टाटा मोटर्स अब म्यांमार (बर्मा) की तरफ रुख कर सकती है।
कंपनी की यहां ट्रक उत्पादन केंद्र स्थापित करने की योजना है। इसके लिए उस सरकार से वित्तीय सहायता भी मिल सकती है। अगर कंपनी की यह योजना कामयाब रही, तो वह इस सैन्य शासित मुल्क की तरफ रुख करने वाली पहली भारतीय ऑटो कंपनी होगी।
टाटा मोटर्स का थाईलैंड में पहले से एक कारखाना है, जहां पिक-अप ट्रक्स का निर्माण होता है। म्यांमार के एक सरकारी अखबार, न्यू लाइट ऑफ म्यांमार, के मुताबिक कंपनी के अधिकारियों ने पिछले हफ्ते वहां के ऊर्जा मंत्री, वाइस एडमिरल शो थीन से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान वहां एक ट्रक उत्पादन केंद्र को स्थापित किए जाने के बारे में चर्चा हुई थी।
यह ट्रक कारखाना भारत की दस साल से ज्यादा पुरानी नीति, ‘पूर्व की तरफ देखो’ का हिस्सा है। इस नीति के तहत भारत एशियान के तहत शामिल देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने में जुटा हुआ है। इसके तहत भारत कई द्विपक्षीय विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
टाटा मोटर्स को इस प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार की तरफ से दो करोड़ डॉलर (100 करोड़ रुपये) की वित्तीय मदद मिल सकती है। इस पैसे का इस्तेमाल एक भारी-भरकम टर्बो ट्रक असेम्बली प्लांट के निर्माण के लिए जाएगा। साथ ही, कंपनी वहां कल-पुर्जों का निर्माण करने वाली एक फैक्टरी का भी निर्माण करेगी।
हालांकि, इस बारे में ज्यादा जानकारियों को उजागर नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि इस कारखाने से उत्पादन इस साल दिसंबर से शुरू हो जाएगा। इस बारे में टाटा मोटर्स को भेजे गए ईमेल का कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। यह आसियान क्षेत्र में कंपनी का दूसरा उत्पादन प्लांट होगा।
इससे पहले उसने दिसंबर, 2007 में थॉनबुरी ऑटोमोबाइल्स के साथ मिलकर थाईलैंड में एक पिक-अप उत्पादन केंद्र को स्थापित करने करने का समझौता किया था। कंपनी दक्षिण कोरिया में देवू ब्रांड के तहत ट्रकों को बनाकर बेचती है। साथ ही, दूसरे मुल्कों को भी उसका निर्यात करती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट कंपनी की मुसीबतों को हल कर सकती है। दरअसल, आज भी कंपनी की 50फीसदी से ज्यादा की कमाई तो भारी वाहनों का कारोबार से आती है। एक विश्लेषक ने बताया कि, ‘व्यावसायिक वाहनों की देसी और प्रमुख विदेशी बाजारों से मांग, उम्मीद से काफी कम रह सकती है। ऐसे में सरकार द्वारा की गई खरीद के सहारे ही ऐसे वाहनों की मांग में इजाफा हो सकता है।’
आने वाली तिमाहियों के दौरान घरेलू बाजार में व्यावसायिक वाहनों की मांग स्थिर या फिर नीचे जाने की भी आशंका है। वजह है, देश की विकास की रफ्तार का सिकुड़ना। टाटा मोटर्स को पिछली तिमाही में पिछले सात सालों का अब तक सबसे बड़ा घाटा झेलना पड़ा था।
पिछली तिमाही में कंपनी 263 फीसदी का नुकसान हुआ था, जबकि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान कंपनी को 499 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। कंपनी को अपने स्टॉक को कम रखने की खातिर पिछले कुछ महीनों में अपने कई कारखानों को भी बंद करना पड़ा है।